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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 277, कुल 332 में से

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पृष्ठ 277

नामदेव : हिन्दी निर्गुण काव्यधारा के प्रारम्भकर्त्ता २८३
दी है। उन्होंने रामानन्द का जन्म संवत् १४५६ (वास्तविक जन्म संवत् से १०० वर्ष
बाद) माना है जो कपोल कल्पित है।
सिकंदर लोदी और कबीर की भेंट भी एक प्रकार से कपोल-कल्पना ही है।
किसी इतिहास ग्रन्थ से यह घटना प्रमाणित नही होती। यदि किसी नवाब या सामन्त
से कबीर की भेंट हुई भी हो तो वह सिकन्दर लोदी नही हो सकता।
ऐतिहासिक काल-क्रम और घटना-चक्र की दृष्टि से यदि किसी ने कबीर के
काल पर विचार किया है तो प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ० रामप्रसाद त्रिपाठी ने।¹ वे
इस परिणाम पर पहुँचे हैं कि कबीर का काल विक्रम की १५वीं शताब्दी के आगे किसी
भी प्रकार नही जाता। सिकंदर लोदी के प्रसंग को वे पूर्णतः अप्रामाणिक मानते है।
उनका मत है कि संवत् १४१७ से १४६१ तक का काल पूर्वी उत्तरी भारत मे क्रान्ति
का काल है। इन दिनों राजनीतिक क्रान्ति और धार्मिक क्रान्ति साथ-साथ चलती रही।
कबीर साहब जैसे प्रवल प्रचारक के लिए यही समय सबसे उपयुक्त था। कबीर सं०
१४०५ में उत्पन्न हुए और अपनी २५-३० वर्ष की आयु मे सं० १४३०-३५ से उन्होंने
अपनी बात लोगो से कहनी प्रारम्भ कर दी थी।
डॉ० रामकुमार वर्मा² डॉ० रामप्रसाद त्रिपाठी के इस निष्कर्ष से सहमत
नही हैं।
रही बात बिजली खाँ की। वह भी पूर्णरूपेण ऐतिहासिक और प्रामाणिक नही
है। सं० १५०७ में नवाब बिजली खाँ ने कबीर का स्मारक बनवाया यह ठीक है
किन्तु यह बात प्रमाणित नही होती कि यह स्मारक मृत्यु के समय का है या कबीर के
जीवन-काल का ?
वास्तव में बिजली खाँ द्वारा कबीर का स्मारक बनवाना उतना महत्वपूर्ण नही
जितना 'आर्किओलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया' में उसका उल्लेख। यह उल्लेख पूर्णतः
ऐतिहासिक है और गलत नही हो सकता। एक प्रकार से यह प्रमाणित तथ्य है। नवाब
बिजली खाँ ने आमी नदी के किनारे कबीर का स्मारक सं० १५०७ मे बनाया। कबीर
की मृत्यु सं० १५०५ में हुई। मृत्यु के पश्चात् बिजली खाँ के मन में स्मारक बनाने
की बात आयी होगी और उसके बनने में एक डेढ़ साल सहज ही लग गया होगा। अतः
१. 'कबीर जी का समय'
—हिंदुस्तानी, अप्रैल १९३२, पृ० २०७-१०।
२. संत कबीर।
—डॉ० रामकुमार वर्मा, पृ० ४७।