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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 276, कुल 332 में से

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पृष्ठ 276

२८२ नामदेव की हिन्दी कविता
कबीर का काल निर्णय
संत कबीर का जन्म-काल यद्यपि आज भी विवाद-रहित नहीं है फिर भी कबीर
के काल निर्णय के संबंध में जितने भी लोगों ने विचार किया है, उनमें से अधिकांश ने
उनका जन्म काल संवत् १४५५ और मृत्युकाल संवत् १५७५ माना है।
कबीर पंथियों में कबीर के आविर्भाव के सम्बन्ध में निम्नांकित दोहा प्रचलित
है।१ इस उल्लेख से कबीर की जन्म-तिथि संवत् १४५५ को ज्येष्ठ की पूर्णिमा प्रामा-
णिक प्रतीत होती है।
कबीर के काल निर्णय में तीन ऐसे प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्ति हैं जो बाधक या
सहायक हैं—रामानन्द, सिकंदर लोदी और नवाब बिजली खाँ।
रामानन्द को कबीर का गुरु कहा जाता है। इसी बात को सिद्ध करने के लिए
दोनों को खींचकर, तान कर, एक साथ लाने का प्रयत्न किया जाता है।
सिकन्दर लोदी (सन् १४८८-१५१७ ई०) और कबीर की भेंट काशी में
बताई जाती है। अतः कबीर और सिकंदर लोदी का भी एक साथ होना आवश्यक है।
वेस्टकॉट, स्मिथ, भांडारकर, मेकालिफ, फहूँहर, ईश्वरी प्रसाद आदि इतिहासकारों ने
भी कबीर को सिकंदर लोदी का समकालीन माना है।
'आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया' में लिखा है कि बिजली खाँ ने कबीर
का स्मारक बनवाया था। अतः बिजली खाँ को भी कबीर का समकालीन होना
चाहिए।
परिणाम-स्वरूप इन चारों ऐतिहासिक व्यक्तियों को किसी प्रकार आगे पीछे
करके एक साथ लाया जाता है। देखना यह है कि क्या सचमुच ये चारों सम-
कालीन हैं?
(१) रामानन्द का काल, सं० १३५६-१४६७।
(२) सिकन्दर लोदी का शासन काल, सं० १५४५-१५७५।
(३) नवाब बिजली खाँ द्वारा बनाया गया कबीर का स्मारक, सं० १५०७।
यदि कबीर का काल सं० १४५५ से १५७५ तक माना जाय तो वे रामानन्द
के शिष्य नहीं हो सकते, इसलिए लोगों ने रामानन्द की प्रामाणिक तिथि और आगे

१. चौदह सौ पचपन साल गए चंद्र वार एक ठाट ठए।
जेठ सुदी बरसायत को पूरनमासी प्रकट भए ॥
—कबीर चरित्र बोध, पृष्ठ ६।
(बोधसागर, स्वा० युग़लानन्द द्वारा संशोधित)