सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६४ नामदेव की हिन्दी कविता
(३) ब्रह्म की निर्गुणता—प्रसिद्ध है कि सन्त नामदेव पहले मूर्ति-पूजक और
सगुणोपासक थे किन्तु बाद में वे कट्टर निर्गुणवादी हो गये। वे ब्रह्म के निर्गुण स्वरूप
में विश्वास करते थे। इस निर्गुण स्वरूप का वर्णन उन्होंने अनेक प्रकार से अनेक
स्थलों पर किया है। उस निर्गुण का वर्णन वे इस प्रकार करते हैं—'वह निर्गुण ब्रह्म
अनेक और एक सब कुछ है। सर्वत्र उसी का प्रकाश दिखाई पड़ता है।'¹
'मैं जिधर भी जाता हूँ उधर भगवान् है जो परमानन्द में लीन हो सदैव
लीलाएँ करता है। नामदेव कहते हैं—'हे भगवान् ! पृथ्वी के जल थल आदि सभी
स्थानों में तुम व्याप्त हो। इधर भगवान् है, उधर भगवान् है, भगवान् के बिना संसार
में कुछ भी नही है।'²
'प्रत्येक जीव के हृदय में भगवान् है। हाथी और चींटी एक ही मिट्टी के बने
हैं। ये सब उसी भगवान् के अदीय पात्र हैं।'³
निर्गुण ब्रह्म का वर्णन करते हुए कबीर कहते हैं कि उसके किसी प्रकार का
रूपाकार नही है। उसके 'रूप अरूप' भी नही है। वह पुष्प की सुगन्ध से सूक्ष्म अनुपम
तत्त्व है।⁴
कबीर ने अपने ब्रह्म को अनेक निर्गुणतावाचक विशेषणों से विशिष्ट किया है।
वे कहते हैं—'वह अलख है, निराकार है, उसका कोई स्थूल रूप नहीं है, उसका आदि
भी नहीं, अंत भी नहीं। वह उत्पन्न भी नहीं होता, नष्ट भी नहीं होता। समझ में
१. एक अनेक बिआपक पूरन जत देखउ तत सोई ।
माइया चित्र विचित्र विमोहित विरला बूकै कोई ।
सभु गोबिंदु है सभु गोबिंदु है गोबिंद बिनु नहि कोई ॥
—सन्त नामदेव की हिन्दी पदावली, पद १५० ।
२. जत्र जाउँ तत्र बीठल भैला । बीठलियो राजाराम देवा ॥ टेक ॥
ईभै बीठलु उभे बीठलु बीठल बिनु ससार नही ॥
—सन्त नामदेव की हिंदी पदावली, पद ६१ ।
३. राम बोले राम बोले राम बिना को बोले रे भाई ॥ टेक ॥
ऐकल मीटी कुंजर चीटी भाजन रे बहु नाना ।
पाँवर जंगम कीट पतंगा सब घटि राम समाना ॥
—सन्त नामदेव की हिंदी पदावली, पद ६ ।
४. जाके मुंह माथा नही नाहि रूप अरूप ।
पुहुप वास ते पातरा, ऐसा तत्त्व अनूप ॥
—कबीर वचनावली, पृ० १ ।