सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनामदेव : हिन्दी निर्गुण काव्यधारा के प्रारम्भकर्त्ता २५५
कहा जा सकता है। अतः ऐसा लगता है कि ई० स० १७०० के आसपास या उसके
पश्चात् ही 'श्री गुरु ग्रन्थ साहब' को स्थायित्व प्राप्त हुआ होगा। इतने लम्बे काल तक
मौखिक परम्परा में रहने वाले इन पदों की पंक्तियों और पाठों में इतना परिवर्तन हो
गया जो असम्भव नही।
'श्री गुरु ग्रन्थ साहब' में प्राप्त होनेवाले ६१ पदों में से ४० पद मराठी गाथा
में प्राप्त होते हैं। विभिन्न स्थानो से जो हस्तलिखित प्राचीन प्रतियाँ मिली हैं उनमें भी
'गुरु ग्रन्थ' के केवल ३० पद प्राप्त होते हैं। 'गुरु ग्रंथ' में १६ पद ऐसे हैं जो कही भी
नही मिलने। जो पद मराठी गाथा तथा हस्तलिखित प्रतियो में प्राप्त हुए हैं उनके
नामदेव रचित होने में कोई संदेह नहीं है पर शेष पदों के सम्बन्ध में निश्चित रूप से
यह नही कहा जा सकता कि ये नामदेव के पद हैं। इनमें से अधिकांश पद किसी अन्य
कवि के हैं जो नामदेव के नाम पर प्रसिद्ध हो गये।
रज्जब की 'सर्वंगी' का महत्त्व इस संबंध में अधिक है। 'सर्वंगी' का संग्रह गुरु
अर्जुनसिंह के काल में ही अथवा कुछ