सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५२ नामदेव की हिन्दी कविता
आचार्य विनयमोहन शर्मा के अनुसार नामदेव उत्तरी भारत के संतों के प्रेरणा
स्रोत रहे हैं। वे कबीर के पूर्व हुए। फिर भी हिंदी साहित्य के विद्वान् उनको निर्गुण
मत का प्रवर्तक मानने में हिचकिचाते हैं।१
डॉ० पीतांबरदत्त बड़थ्वाल संत मत के प्रवर्तक होने का श्रेय कबीर को देते
हैं किंतु इसके साथ वे यह भी स्वीकार करते हैं कि उसका बीजारोपण पहले ही हो
चुका था।२
डॉ०सरनामसिंह स्पष्ट शब्दों में कहते हैं कि कबीर को संत मत का प्रवर्तक
मानना भूल है। उनको हम संत मत की उज्ज्वल मणि कह सकते हैं।३
डॉ० राममूर्ति त्रिपाठी इस संदर्भ में विभिन्न मत रखते हैं। उनके अनुसार केवल
नामदेव और कबीर में पाई जानेवाली विशेषताओं के आधार पर नामदेव निर्गुण मत के
प्रवर्तक नहीं हो सकते।४
नामदेव के निर्गुणधारा के प्रारम्भकर्त्ता न माने जाने के कारण
ऊपर यह कहा गया है कि कई विद्वानों ने नामदेव के निर्गुण धारा के प्रवर्तक
१. 'नामदेव कबीर से पूर्व हुए। उन्होंने निर्गुण भक्ति का उत्तर में वर्षों प्रचार किया।
फिर भी उन्हें इस पथ का प्रवर्तक मानने में विद्वानों को क्यों झिझक होती है?'
—हिंदी को मराठी संतों की देन, पृष्ठ १२६ ।
२ 'निर्गुण संत विचार धारा को कबीर के द्वारा पूर्णता प्राप्त हुई परन्तु रूपाकार तो
यह पहले से ही ग्रहण करने लग गई थी।'
—हिंदी काव्य में निर्गुण संप्रदाय, पृ० ६४।
३. 'कबीर पंथवादी थे यह समझना भ्रम होगा। किंतु यह सत्य है कि उन्हें नया
पथ चलाने की आवश्यकता प्रतीत हुई थी क्योंकि वे समन्वयवादी थे। निर्गुण पथ
इसीलिए उनका नहीं समझ लेना चाहिए कि उसमें कोई नया चीज थी। ईंट और
रोड़े सब पुराने थे। यदि कोई नवीनता थी तो उनके भानुमती का कुनबा जोड़ने
में थी।'
—कबीर एक विवेचन, पृ० १०३।
४ 'निष्कर्ष यह कि निर्गुण धारा के कबीर जैसे संत से पूर्ववर्ती साधकों में भी यदि
समान विशेषताएँ ढूँढ़ी जायें तो मिल सकती हैं। अतः केवल समान विशेषताओं
के आधार पर नामदेव को निर्गुण मत का प्रवर्तक सिद्ध नहीं किया जा
सकता।'
'निर्गुण मत के प्रवर्तक नामदेव या कबीर'
—सम्मेलन पत्रिका भाग ५३ संख्या १, २ पौष-ज्येष्ठ शक १८८६।