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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 243, कुल 332 में से

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पृष्ठ 243

नामदेव : हिन्दी निर्गुण काव्यधारा के प्रारम्भकर्ता २४६
तथा निर्गुण काव्य धारा पर विचार करने वाले लोगो ने अधिकतर कबीर को ही
उसका प्रवर्तक माना है ।
कबीर सम्बन्धी उर्दू आलोचनात्मक ग्रन्थ
(१) 'सम्प्रदाय' ( रचना काल सन् १६०६ ई० )
लेखक: प्रोफेसर बी० बी० रॉय ।
(२) 'कबीर और उनकी तालीम' ( रचना काल सन् १६१२ ई० )
(३) 'कबीर पंथ ।'
इन दोनो ग्रन्थों के लेखक महर्षि शिवव्रतलाल हैं ।
(४) 'कबीर साहब' (रचना काल ई० स० १६३०)
लेखक : मनोहरलाल जुत्शी ।
ये सभी साधारण कोटि की पुस्तकें हैं । कबीर संबन्धी प्रारम्भिक ज्ञान प्राप्त
करने के लिए इनका महत्त्व अवश्य है ।
कबीर सम्बन्धी अंग्रेजी आलोचनात्मक ग्रन्थ
(१) प्रॉफिट्स ऑफ इंडिया:—सन् १६०४ ई० में श्री मन्मथनाथ गुप्त की इस
पुस्तक का उर्दू अनुवाद 'रहनुमायाने हिंद' बाबू नारायणप्रसाद वर्मा द्वारा अहमदी प्रेस
अलीगढ़ से प्रकाशित कराया गया है ।
इस ग्रन्थ के प्रकाशन के बाद अंग्रेजी में कबीर सम्बन्धी जितनी भी पुस्तकें
प्रकाशित हुई है प्रायः सभी में 'प्रॉफिट्स ऑफ इंडिया' का किसी न किसी रूप में उपयोग
अवश्य किया गया है ।
(२) कबीर एण्ड कबीर पंथ—प्रकाशन काल सन् १६०७ ई० । इसके लेखक
रेह्वरंड जी० जी० एच० वेस्टकट है। इस पुस्तक से कबीर की विचार धारा के सम्बन्ध
में बहुत ज्ञात नही होता ।
(३) हंड्रेड पोएम्स ऑफ कबीर—कवीन्द्र रवीन्द्र ने सन् १६१५ में कबीर के
चुने हुए १०० पदों का अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित किया । इसकी भूमिका अंग्रेजी की
प्रसिद्ध विदुषी ईवोलिन अंडरहिल ने लिखी है ।
(४) 'वैष्णविज्म शैविज्म ॲण्ड अदर मायनर रिलीजस सिस्टम्स'—डॉ०
रा० गो० भांडारकर ने अपनी इस पुस्तक में वैष्णव धर्म, शैव धर्म आदि विभिन्न
सम्प्रदायों के उदय और विकास का इतिहास प्रस्तुत किया है और प्रसंगवश रामानन्द
तथा कबीर की भी चर्चा की है । कबीर के जन्म और उनके दार्शनिक विचारों का विशेष
रूप से प्रतिपादन लेखक के मौलिक दृष्टिकोण का परिचायक है ।