सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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इनमें अनन्तदास कृत नामदेव की परिचयी महत्वपूर्ण है। प्राचीन संत कवियों के
संबंध में नाभादास का 'भक्तमाल' बहुत प्रामाणिक ग्रंथ माना जाता है। अनन्तदास की
परिचयी इससे भी पूर्व की है। भक्तमाल के रचनाकाल के संबंध में पूर्ण मतैक्य नहीं
है। डॉ० दीनदयालु गुप्त ने इसका रचनाकाल सं० १६८० वि० माना है।१ अनन्त-
दास कृत नामदेव की परिचयी का रचनाकाल सं० १६४५ वि० है।२
(१) निर्गुण साहित्य सम्बन्धी आलोचनात्मक ग्रंथ—निर्गुण साहित्य संबंधी
विभिन्न भाषाओं में समीक्षात्मक ग्रंथ उपलब्ध होते हैं जिनका आधार लेकर कबीर की
विचार धारा स्पष्ट रूप से समझी जा सकती है। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में भी एतद्-
विषयक निबन्ध प्रकाशित होते रहे हैं। जिन भाषाओं में निर्गुण साहित्य के ग्रंथ प्राप्त
होते हैं वे निम्नलिखित हैं—
(क) हिंदी में निर्गुण विचारधारा संबंधी आलोचनात्मक ग्रंथ
(ख) अंग्रेजी में निर्गुण विचार धारा संबंधी बालोचनात्मक ग्रंथ
(ग) उर्दू में निर्गुण विचार धारा संबंधी आलोचनात्मक ग्रंथ
(घ) विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित निर्गुण मत संबंधी आलोचनात्मक
लेख।
(क) हिंदी आलोचनात्मक ग्रन्थ
अधिकतर ग्रन्थ कबीर पर लिखे गये हैं किन्तु उनके अन्तर्गत निर्गुण साहित्य का
पूरा विवेचन मिलता है। कबीर के अध्ययन का श्रीगणेश सन् १६०० ई० के लगभग
मानना होगा। हिंदी में ऐसी अनेक पुस्तकें प्राप्त होती हैं जिनमें किसी न किसी प्रकार
कबीर तथा निर्गुण पंथ की चर्चा की गई है। उनमें से कुछ महत्वपूर्ण ग्रन्थों का बहुत ही
संक्षेप में परिचय दिया जा रहा है।
(१) कबीर मंसूर—कबीर पर सबसे पहली पुस्तक 'कबीर मंसूर' ई. स.
१६०२-३ में प्रकाशित हुई। साहित्य की दृष्टि से यह रचना साधारण कोटि की है किन्तु
कबीर पर प्रथम पुस्तक होने के कारण इसका महत्त्व बढ़ जाता है।
इसके पश्चात् 'कबीर ज्ञान' (ई. स. १६०४) 'कबीर साहब का जीवन चरित्र'
(ई. स १६०५) 'कबीर कसौटी' (ई. स. १६०६) आदि ग्रन्थ भी प्रकाशित हुए।
(२) कबीर वचनावली—इसका संपादन पं० अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
१. अष्टछाप और वल्लभ संप्रदाय पृष्ठ १०६।
२. नामदेव की परिचयी (हस्तलिखित ग्रन्थ) क्रमांक ३६८।
—जयकर ग्रन्थालय, पूना विश्वविद्यालय, पूना।