सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 239, कुल 332 में से
संदर्भ में पढ़ेंनामदेव : हिन्दी निर्गुण काव्य धारा के प्रारंभकर्त्ता
हिंदी निर्गुण काव्य सम्बन्धी लेखन का परिचय—हिंदी निर्गुण काव्य और
उसके रचयिताओं के बारे में लगभग चार सौ वर्षों से कुछ न कुछ लिखा जाता रहा है।
प्रारंभिक लेखन में 'भक्तमाल' और परिचर्या जैसी दूसरी रचनाओं का बहुत अधिक
महत्व है। नाभादास कृत 'भक्तमाल' इस परंपरा का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है। इसमें १६ वीं
शताब्दी तक के लगभग सभी संतों और भक्तों के संबंध में कहा गया है। यह बात अवश्य
है कि इसमें संत साहित्य की समीक्षा न करके संतों के महत्व पर ही अधिक बल दिया
गया है। 'भक्तमाल' में लगभग सभी निर्गुण संतों के कार्य और महत्त्व के संबंध में लिखा
गया है। इसी तरह प्रियादास और रूपकला के भक्तमाल भी हैं।
भक्ति काल के संतों के महान् व्यक्तित्व और कल्याणकारी संदेशों से प्रभावित
होकर उनके अनुयायियों ने इनके चरित्र और व्यक्तित्व को जनता के मार्ग दर्शन के लिए
छन्दोबद्ध किया। संतों के जीवन-चरित्र समय-समय पर अनेक बार लिखे गये। ये
जीवन-चरित्र 'परिचर्या' के रूप में लिखे गये हैं। इनमें संतों के जीवन-चरित का परिचय
बड़े विस्तृत रूप में दिया गया है। संत काव्य में निम्नलिखित संतों की परिचर्यायें प्राप्त
होती हैं—
(१) कबीरजी की परचै
(२) नामदेवजी की परचै
(३) पीपाजी की परिचई
(४) त्रिलोचनजी की परचई
(५) रैदासजी की परचई
(६) मलूकदासजी की परचई
(७) जगजीवन साहब की परचई
(८) चरनदासजी की परचई
(६) दादू जनम लीला परची
(१०) रंका बंका की परचई