सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४२ नामदेव की हिन्दी कविता
भिक हिंदी की वियोगात्मक प्रवृत्ति का सूचक है। नामदेव की भाषा में निम्नलिखित
परसर्ग प्रयुक्त हुए हैं—
अन्तरि, आगे, आगै, काज, कारणि, तनि, नाई, निकटि, पर, विच, विचि,
बिन, बिना, भांति, भीतरि, मधि, मधै, महि, मझि, मारे, माहि, माही, रहित, रहिता,
लगि, लागि, लाग्यौ, स्वारथ, संगै, संगि, सनमुख, सहित, सहिता, सा, सी, से, सोह, सो,
हो, हेत।
संयुक्त परसर्ग—
के अन्तरि, के आगे, के निकटि, के मारे,
की नाई, कै संगि।
ध्वनि
नामदेव की हिंदी पदावली की भाषा में नव्य भारतीय आर्य भाषा की सभी
ध्वनियों का प्रयोग है, किन्तु अन्य भाषाओं की तरह 'ष' और 'ऋ' ध्वनि का प्रयोग
केवल परंपरागत है। उसका उच्चारण 'स' और 'रि' की तरह होता था। कुछ स्थानो
पर 'ष' के स्थान पर 'स' और 'ऋ' के स्थान पर 'रि' का प्रयोग भी मिलता है।
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