सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४० नामदेव की हिन्दी कविता
पंजाबी
पंजाबी के केवल ये दो उदाहरण हैं—
मिलसी (१०१-१) 'मिलना' का भविष्यत् काल का रूप
मुनै (१०१ १) मुझे
अरबी और फारसी का प्रभाव
नामदेव की हिंदी में निम्नलिखित अरबी के शब्द मिलते हैं—
कलमा (६४-६) कलमा = प्रार्थना
अलह (६४-१०) अल्हा-परमात्मा
रोजा (६४-६) रोजा = व्रत, उपवास
कूं त मसाहति (२-८) तर्क वितर्क
फारसी के शब्द
आलम (१३१-३) विश्व
दुनी (१३१-३) दुनिया
अवदालव (६४-१) साधु, फकीर जैसा
इजार (६४-५) रस्सी, डोरी, नाड़ा
गुजार (६४-६) गुजारना = बीताना
ताज कुलह (६४-२) मुकुट और टोपी
निवाजी (६४-६) नमाज
पोस (६४-३) पोश = आवरण
मसीती (६४-६) मसजिद
मुलाना (६४-६) उपाध्याय
सहर (६४-८) शहर
सहनक (६०-४) थाली, प्लेट
बाँग (६४-६) बुलावा
खसम (७६-२) खसम = पति
साहिब (४१-१०) स्वामी
स्याही (७७-१) स्याही—
रूप रचना
रूप रचना की दृष्टि से नामदेव की हिंदी ब्रजभाषा के रूपों से बहुत साम्य
रखती है। सभी नव्य भारतीय आर्य भाषाओं की तरह इसमे भी दो वचन हैं। यद्यपि