सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३६ नामदेव की हिन्दी कविता
(१) पूर्वकालिक क्रिया मुख्य क्रिया है—
फिरि आवै, समझि परी, करि आई
उतरि गेला, मिलि रहिया, करि जानौ ।
(२) कियार्थक संज्ञा मुख्य क्रिया है—
खान लागो, सोवन लागा, सारन लागो । ऐस रूप केवल 'लगना' गौण क्रिया
के साथ ही मिलते हैं ।
(३) कृदन्तीय रूप मुख्य क्रिया है
घूमत आया, आवता देखी, सरज्यो जाई, लहरश जाई ।
नामदेव की हिंदी पर अन्य भाषाओं का प्रभाव
नामदेव की हिंदी अन्य भाषाओं जैसे मराठी, गुजराती, पंजाबी, अरबी तथा
फारसी से प्रभावित है । यह उनकी घुमक्कड़ी वृत्ति का ही परिणाम है ।
मराठी उनकी मातृभाषा होने के कारण उसका प्रभाव उपरिलिखित अन्य
भाषाओं की अपेक्षा अधिक है । नामदेव की शब्द-संपत्ति तथा रचना विधान मराठी से
प्रभावित है ।
सबध कारक के कारक-चिन्हों तथा सर्वनामों के प्रयोग में गुजराती का प्रभाव
देखा जा सकता है ।
पंजाबी के प्रभाव के केवल दो ही उदाहरण मिलते हैं ।
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