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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 229, कुल 332 में से

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पृष्ठ 229

नामदेव की रचनाओं का साहित्यिक मूल्यांकन २३५
कुछ स्थानो पर तो भूतकाल को प्रकट करने के लिए हिंदी और मराठी दोनों
प्रत्यय एक साथ लगाये गये हैं। जैसे—
आईला (३१-१) (आई + ला) आया या आयी
कटीला (४७-२) (काटी + ला) काटा या काटी
समाईला (३१-५) (समाई + ला) समाया या समायी
लाईला (२३-१) (लाई + ला) लाया या लायी
पाईला (३१-१) (पाई + ला) पाया या पायी
मराठी का 'ला' प्रत्यय जो भूतकाल का प्रत्यय है नामदेव की हिंदी में भविष्यत्
काल के लिए प्रयुक्त होता है। जैसे—
(१) जा दिन भगता आईला । (३१-१) आईला—आयेगा ।
(२) परहरि धंधाकार सबेला ।
चेरी चिंता राम करेला ॥ (३३-२) करेला—करेगा ।
विशिष्ट पद रचना
नामदेव की हिंदी में कुछ विशिष्ट पद-रचनाएँ (word formations) मिलती
है। जैसे—
(अ) अनंत अमर फल देली । (६७-८)
हिंदी की 'देना' क्रिया का रूप दिया है। मराठी की 'देणे' क्रिया का भूतकाल
का रूप 'दिला' है परन्तु नामदेव 'देली' का प्रयोग करते है जो न हिंदी का है न
मराठी का ।
(आ) 'करीया' (५४-४) करना
'कथिया' (७६-१) कहना
उधरीया (५४-४) उद्धार करना
प्राचीन हिंदी पद्य में भूतकाल का प्रत्यय 'आ' अथवा 'या' पाया जाता है परंतु
यहाँ 'इया' का प्रयोग हुआ है ।
संयुक्त क्रिया का प्रयोग
नामदेव की भाषा में संयुक्त क्रियाओं का प्रयोग बहुत अधिक संख्या में हुआ
है। इनमें मुख्य क्रिया पूर्वकालिक क्रिया के रूप में या कृदन्त के रूप में है। जिन
संयुक्त क्रियाओं में पूर्व कालिक क्रिया मुख्य क्रिया या क्रियार्थक संज्ञा है इसमें पूर्वकालिक
क्रिया में कोई परिवर्तन नही होता। वचन, लिंग और काल का निर्देश गौण क्रिया द्वारा
होता है—