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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 228, कुल 332 में से

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पृष्ठ 228

२३४ नामदेव की हिन्दी कविता
गोठि (२५-२) मित्रता, (गोष्ठि) भजन (६-२) शरीर
जलहरि (१०३-६) जलघर, तालाब मनिषा (१२-५) मनुष्य
जिरो (१२०-७) घाव मायण (५६-३) दूध
नाठा (१५-३) गांठ डिंभ (४३-६) बालक
रजबत (११-४) राज्य बल रैनी (३६-२) रहनी
साइर (४६-४) सागर
क्रियाएँ
थहता (६३-६) रहते हुए लागो (८८-१) प्राप्त करना
घोषता (६०-३) देखना बूठा (१०१-२) डूबना
यावा (१०१-३) जाना पबनी (१३-३) बिताना
बले (१०७-६) जलना घेने व्यवहार करना
विशेषण
वरतणी आज्ञाकारी सोवनी (१४०-७) स्वर्णिम
एकल (६-२) एक भगरा (२३-४) पागल
कृतम (२०-३) कृत्रिम सरजीव (४७-३) सजीव
पेटाबलू (२४-४) पेटू
क्रिया विशेषण
अनत्र (८६-१) अन्यत्र पिछोकडि (४७-४) पीछे
परहा (१२७-५) दूर
विशिष्ट व्याकरणिक रूपों का प्रयोग
नामदेव की हिंदी में कुछ विशिष्ट व्याकरणिक रूपों का प्रयोग भी मिलता है।
कई हिंदी मूल शब्दों में मराठी का प्रत्यय जोड़ा गया है।
मराठी का 'ला' प्रत्यय भूतकालीन क्रिया का प्रत्यय है। किन्तु नामदेव की हिंदी
में इसे 'ले' बनाकर जोड़ा गया है। उदाहरणार्थ—
अनिले (१६-२) लाना भराइले (६१-२) भरना
गूँथिले (६१-६) गूँथना लागिले (५६-२) अनुभव करना
जोइले (६१-८) तैयार करना मेलिहै (५६-४) रखना
मूँदिले (६७-५) मूँदना चोधिले (६७-५) देखना