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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 21, कुल 332 में से

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२२ नामदेव की हिन्दी कविता
शास्त्र की खोज इस परमतत्व के संबंध में कहाँ तक पहुँची है, उसे भी देखना चाहिए।
वैज्ञानिक यदि प्राकृतिक दृश्यों और घटनाओं का उद्घाटन करता है तो दार्श-
निक इस उद्घाटन का संश्लेषण विश्लेषण करता हुआ, प्रकृति के पर्दे को चीर कर उस
सत्ता को साक्षात् कर लेना चाहता है, जो प्रकृति की पल-पल की नवीनरूपता एवं
स्थिरता के मूल में विद्यमान है।¹
प्रकृति परिवर्तनशील है। उसमें नित्य नये परिवर्तन होते रहते हैं। सूर्य चंद्रादि
भी अपनी उत्पत्ति और विनाश की कहानी साथ लिए हुए हैं। दार्शनिक उत्पादक को
ही संहारकर्ता के रूप में भी देखता है और कहता है : 'ये दृश्य, ये खिलौने उसी
खिलाड़ी के हाथ मे हैं। वह लीलामय इनके द्वारा अपनी लीला दिखाता है और फिर
उन्हें बंद कर देता है।'² यह विश्व उसी कलाकार की कला है और उसी के स्वभाव
की अभिव्यक्ति है।
भारत के प्रसिद्ध दार्शनिक बादरायण व्यास ने 'ब्रह्म सूत्र' के प्रारंभ में ही ब्रह्म
की जिज्ञासा करते हुए लिखा :
'जन्माद्यस्य यतः'
जो विश्व के जन्म, स्थिति और संहार का कारण है वह ब्रह्म है। यह ब्रह्म
परिवर्तनशीलों में अपरिवर्तनीय, अनित्यों में नित्य, मर्त्यो में अमर्त्य और अंतिम सत्य है।
प्रकृति के रूप विभक्त हो सकते हैं परन्तु यह अविभाज्य, एक रस शाश्वत सत्ता है।
भारतीय दर्शनों में सांख्य, बौद्ध तथा चार्वाक या बार्हस्पत्य दर्शन निरीश्वरवादी
कहलाते हैं। शेष सभी दर्शनों में ईश्वर के अस्तित्व का प्रतिपादन हुआ है। कपिल
अपने सांख्य दर्शन ५-४७ में वेदों का अपौरुषेयत्व तथा ६-३४ और ५-५१ में वेदों का
स्वतः प्रामाण्य स्वीकार करते हैं परन्तु ईश्वर के संबंध में उनका मत है कि वह प्रमाणों
द्वारा सिद्ध नहीं हो सकता। उसकी सिद्धि में प्रमाणों का अभाव है।

  1. Philosophy is not knowledge of the world, but knowledge
    of the not-worldly, not knowledge of external mass, of the
    empirical existence, but knowledge of what is eternal, what
    is God and what flows from His nature.
    —Constructive Basis for Theology p. 191-192.
    James Ten Brooke
  2. Our world is God's handiwork and a real expression of
    His nature.
    —Religion and Biology p. 98.
    अर्नैस्ट ई० अनविन