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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 195, कुल 332 में से

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पृष्ठ 195

नामदेव की रचनाओं का साहित्यिक मूल्यांकन २०१
किंतु जहाँ स्वानुभूति की अभिव्यक्ति है वहाँ घनता और गंभीरता दोनों हैं।
काव्य निर्मिति के प्रमुख कारण
हमारे यहाँ के साहित्यशास्त्रकारों ने काव्य निर्मिति के तीन आवश्यक अंग
बताये हैं। जैसे प्रतिभा, व्युत्पन्नता और परिश्रम। इसके साथ ही साथ भावनात्मकता
को भी काव्य रचना के लिए आवश्यक गुण बताया जाता है। वैसे नामदेव की हिंदी रच-
नाओं में कही भी कवित्व के कारणों की चर्चा नही है। उनकी मराठी की रचनाओं के
आधार पर उनके काव्य गुणों की हम परीक्षा कर सकते हैं।
प्रतिभा
दण्डी के अनुसार प्रतिभा निसर्ग की देन है।¹ यह प्रयत्न द्वारा अर्जित नहीं की
जा सकती। कवि जन्म-जात होता है। उसे ठोक-पीट कर कवि बनाया नहीं जा
सकता।² नामदेव की भी यही धारणा है। वे कहते हैं, 'हे हरि ! तुम्हारी कृपा के
फलस्वरूप वाक् सुमनों की यह माला मैं गूँथ सका।'³
विद्याभूषण के अनुसार प्रतिभा नव-नव उन्मेष धारण करने वाली शक्ति है।⁴
नामदेव की रचनाओं में प्रतिभा के ऐसे नये-नये उन्मेष स्थान स्थान पर पाये जाते हैं।
नन्द के यहाँ के पुत्रजन्मोत्सव का वर्णन करते हुए नामदेव कहते हैं कि 'जो विश्व का
पिता है, जो सारे संसार का सूत्र संभाले हुए है वह अपने आपको नन्द जी का पुत्र
कहलाता है।'⁵
पुराने विषयों को नूतन कल्पनाओं से सँवार कर, सजा कर प्रस्तुत करना प्रतिभा
की विशेषता है। इस दृष्टि से भी नामदेव का काव्य अध्ययनीय है। नरदेह नश्वर है।
१. नैसर्गिकी च प्रतिभा ।
—काव्यादर्श (१ । १०३) ।
2. Poets are born and not made.
३. नामा म्हणे हरि बोलिलो तुम्हिचा बले ।
वाहिली तुलसी दले स्वामी लागी ॥
—सकल संत गाथा, अभंग १२१८ ।
४. प्रज्ञा नवनवोन्मेष शालिनी प्रतिभा मता ।
५. विश्वाचा जो बाप हाती ज्याच्या सूत्र ।
म्हणवितो तो पुत्र नंदजीचा ॥
—वही, अभंग ४१ ।