सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 19, कुल 332 में से
संदर्भ में पढ़ेंबना बैठा है। जीवन रसायनी बनकर वह फलों में रस, मसालों में स्वाद और फूलों में
गंध उत्पन्न करता है। जल और कार्बन के पृथक्-पृथक् अनुपात से लकड़ी और शक्कर
भी उसी ने तैयार की है और इस प्रक्रिया द्वारा ओषजन उत्पन्न किया है जो पशुओं का
जीवन है। प्रोटोप्लाज्म की एक अदृश्य बूंद सूर्य से प्राण शक्ति पाकर समस्त जीवन-
जगत् का कारण बनी हुई है। यह जीवन प्रकृति से उत्पन्न नहीं हुआ। फिर इस जीवन
का स्रोत कहाँ है ? हक्सले के शब्दों में इस जीवन का स्रोत जीवन ही है। जीवन किसी
संगठन का परिणाम नही, प्रत्युत उसका कारण है।¹
विज्ञान के अनुसंधान जब स्वयं वैज्ञानिक को सोचने का अवसर देते हैं और
उसके मस्तिष्क पर अपना प्रभाव डालते हैं तो वैज्ञानिक की स्थिति दार्शनिक की-सी
हो जाती है। जब वह देखता है कि सृष्टि में पाया जाने वाला पूर्ण क्रम इसके पूर्व
पूर्णतया अस्त-व्यस्त (Chaotic) सामग्री को अनंत व्यक्तियों या इकाइयों के ढाँचे में
ढालने वाले व्यक्तिकरण (Individuation) के रूप में था तो वह यह सोचता है कि
क्या यह सब अपने आप हो रहा था ?
दूसरी ओर वह बालमनोविज्ञान, जो स्वतः अब एक प्राकृतिक विज्ञान माना
जाने लगा है, के आधार पर बालक के इंद्रिय संवेदन (Sensation), भेदीकरण
(Differentiation) और पदार्थ बोध (Perception) के क्रम में, सृष्टि के उसी क्रम
को देखता है और यहाँ उस चेतना संपन्न बालक की सहायता करने वाले अन्य चेतन
मानवों को देखता है, तो सृष्टि को क्रम को पूर्णता पर पहुँचाने वाली एक महा चेतन
सत्ता की ओर स्वभावतः उसकी कल्पना चली जाती है।
हम स्वयं अपने सामने मिट्टी के ढेर में से पानी तथा कुछ यंत्रों की सहायता
से मानव को ईंटें बनाते और उन ईंटों से महल बनाते देखते हैं। इस निर्माण में भी
फैली हुई सामग्री, सामग्री का व्यक्तिकरण और व्यक्तिकरण से व्यवस्था की ओर चलने
में एक निश्चित क्रम पाया जाता है और उस क्रम के मूल में एक चेतन सत्ता का हाथ
दिखाई देता है। सर जेम्स जोन्स ने इसे चेतना (Thought) और आइन्सटीन ने इसे
बुद्धि (Intelligence) या (Rationality) नाम दिया है।
सृष्टि विभिन्नरूपा होकर भी एक है। अंग्रेजी में इसका नाम ही Universe
है, जिसे हिंदी में एकात्म काव्य कहा जा सकता है। वेद तो इसे देव का काव्य कहता
ही है। काव्य की संगीतात्मक, भावात्मक एवं कल्पनात्मक, एकता उसके जनक चेतन
तत्व की एकरूपता को प्रकट करती है। इसी प्रकार सृष्टि का काव्यत्व (Harmony)
उसके एक स्रष्टा होने का संकेत देता है, जो चेतन है।
बाहर सृष्टि के विभिन्न अवयव मिलकर एक दूसरे को आकर्षित करने तथा
- Life is the cause and not the consequence of organism.