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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 18, कुल 332 में से

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पृष्ठ 18

हिन्दी निर्गुण काव्यधारा की पृष्ठभूमि १६
क्षेत्रों की खोजों से सिद्ध हो रहा है।
पृथ्वी मंडल पर जो जीवन पाया जाता है वह आकस्मिक नहीं है। उसका एक
विशिष्ट उद्देश्य है। पार्थिव वनस्पतियाँ सूर्य से आती हुई प्राण-शक्ति को लेकर अपने
सरल अणुओं (molecules) को विविध अणुओं में परिणत कर देती हैं। वृक्षों से भरे
हुए जंगल पृथ्वी की उर्वरा शक्ति को मरुस्थल के आक्रमणों से सुरक्षित रखते हैं। वे
मिट्टी को वर्षा की बाढ़ में वह जाने से भी रोकते हैं। संस्कृत में जल को जीवन कहा
गया है। आधुनिक वैज्ञानिक भी जल के तत्त्वों का विश्लेषण करके इसी परिणाम पर
पहुँचे हैं। कैनेथ वॉकर ने¹ हेंड्रेल का मत उद्धृत करते हुए लिखा है कि जल में
जिस अनुपात से जीवन को सुरक्षित रखनेवाले तत्त्व मिश्रित हैं उनसे बढ़कर हमारे
वातावरण में और कुछ हो नहीं सकता। इस सम्बन्ध में जल के स्थान को और कोई
द्रव्य नहीं ले सकता। जीवन और जीवन संबंधी साधनों का यह विशाल कारखाना
किसकी देखरेख में चल रहा है ?
इस जीवन का भी जीवन निःसंदेह एक मूल महा जीवन है, जिसने तक्षा के
रूप में विभिन्न मूर्तियों के नाना रूप सांचे तैयार किये हैं। वृक्षों के पत्तों और फूलों के
रंगों में उसकी अद्भुत कारीगरी प्रकट हो रही है। पक्षियों के कलरव में वह संगीतकार
लघुतर एवं लघुतम यंत्र विद्यमान हैं जो मानव की खोज शक्ति तथा व्याख्या-
शक्ति की सीमा में आज तक आबद्ध नहीं हो सके। ये विभिन्न यंत्र अपने
समस्त अंशों के साथ ऐसे घनिष्ठ रूप में संयुक्त हैं कि सभी विचारशील
मानव उसकी प्रशंसा करते हैं। प्राकृतिक जगत् में साधन और साध्य का
संबंध सर्वत्र वैसा ही है जैसा मानवीय बुद्धि की कृतियों में दृष्टिगोचर होता
है, अथवा यह कहना युक्तिसंगत होगा कि वह इससे कही अधिक बढ़कर
है। जब कार्यों में समता है, तो कारणों में भी समता होनी ही चाहिए।
अतः मानव-मस्तिष्क की ही भाँति, प्रकृति के महान् कार्य जगत् का रचयिता
एक ऐसा महान् मस्तिष्क होना चाहिए, जिसमें महत् कार्य की अपेक्षा महत्
शक्तियाँ भी विद्यमान हों।'
'The Idea of God' p. 9, 10
—Pringle Pattison.

  1. The various properties of water are uniquely suitable for
    the support of life No other substance could substitute
    water in an environment like ours,
    —'Meaning and Purpose' p. 102