सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 189, कुल 332 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 189

१६४ नामदेव की हिन्दी कविता
सबद और रमैनी तालाब का पानी है जो सर्व सुलभ है ।'¹
संतों ने संस्कृत को त्याग कर जन भाषा अपनायी । नामदेव को भागवत धर्म
का महान् संदेश देना था अतः उन्होंने मराठी में रचना की । बाद में उन्होंने हिंदी में
कुछ वाणियाँ कही, जिनका देशभर में प्रचार हुआ ।
इस प्रकार इन विचारों से यह लगता है कि संत नामदेव ने एक नये प्रकार
के वेदांत का निर्माण किया ।
१. वेद सुवाणी कूप जल दुख सू प्रापति होय ।
सबद साखि सरवर सलिल सुख पीवै सब कोय ॥
—रज्जबजी की वाणी ।