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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 185, कुल 332 में से

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पृष्ठ 185

१६० नामदेव की हिन्दी कविता
ज्ञानदेव की भाँति नामदेव ने भी इस वात्सल्य भावना का आविष्कार किया है।
वे कहते हैं—'विठ्ठल-मैया का मुझ पर कृपा-छत्र है। स्मरण करते ही वह मुझे स्तन-
पान कराती है। मेरी भूख प्यास बिना बताये ही वह जान लेती है। घड़ी भर के लिए
भी वह मुझे छोड़ने के लिए तैयार नही है।'१
संत जनाबाई ने विठ्ठल को एक ऐसी माता के रूप में चित्रित किया है जिसकी
गोद में तप, कंधे पर सत-रूपी बालक है।२
संत एकनाथ के एक 'भारुड' में यही प्रेम भावना व्यक्त हुई है।३
संत तुकाराम कहते हैं कि विट्ठल रूपी माता के भरोसे हम निश्चित हैं।४
एक अन्य स्थल पर पांडुरंग को 'विठाई माउली' (विट्ठल रूपी मैया) के नाम
से संबोधित करते हुए नामदेव कहते हैं—'यदि तू मेरी माता है तो मैं तेरा बछड़ा हूँ।
तू मेरी हरिणी है तो मैं तेरा छोना हूँ। हे पांडुरंग ! मेरे भव पाश तोड़ दो। तू मेरी
पक्षिणी है तो मैं तेरा अंडज हूँ। तू मुझे दाना चुगा। नामदेव कहते हैं कि परमात्मा
प्रीति के वश होते हैं, आगे पीछे खड़े होकर वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।'५
नामदेव की हिंदी रचनाओं में भी भक्त की भगवान के प्रति मिलन उत्कंठा
की मधुर अभिव्यक्ति है। इसे वे 'ताल बेली' शब्द से परिचित कराते हैं जिसका अर्थ
— — — —
१. विठ्ठल माउली कृपेची सावली। आठवितां घाली प्रेम पान्हा।
न सांगता जाणे तान्हे भूक। जवळी व्यापक न विसंबे ॥
—सकल संत गाथा, अभंग ४७८ ।
२. विठु माझा लेकुरवाला। संगे गोपालाचा मेळा।
जनी म्हणे गोपाला। करो भवताचा सोहळा ॥
—जनाबाईचे अभंग, अभंग ३० ।
३. देव एकनाथाचा वछड़ा ।
४. विट्ठल माझी माय। आम्हा सुखा उणें काय ?
—तुकाराम गाथा, अभंग २२३१ ।
५. तू माझी माउली मी वो तुझा तान्हा। पाजी प्रेम पान्हा पांडुरंगे ।
तू माझी हरिणी मी तुझें पाडस। तोडी भव पाश पांडुरंगे ॥
तू माझी पक्षिणी मी तुझें अंडज। चारा घाली मज पांडुरंगे ॥
नामा म्हणे होसी भक्तीचा वल्लभ। मागे पुढें आम्हा सांभाळिसी ॥
—सकल संत गाथा, अभंग १५११ ।