सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५८ नामदेव की हिन्दी कविता
सब प्रकार के सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक बंधनों से मुक्त थे फिर भी वे अपने
युग की क्रियाओं और प्रति क्रियाओं की उपेक्षा नहीं कर सके । यह अवश्य है कि उन
पर इस्लाम का प्रत्यक्ष और गहरा प्रभाव दिखलाई नहीं पड़ता । इस्लाम एक आस्था-
प्रधान धर्म है उसमें बुद्धिवादिता के लिए कोई स्थान नहीं है । इसके विपरीत सन्त मत
की आधारभूमि बुद्धिवादिता रही है । अतएव वे कोरी आस्था में, जो अन्धविश्वास की
सीमा तक पहुँच गयी थी, विश्वास नहीं करते थे । इसीलिए उन्होंने कोरे आस्था-प्रधान
इस्लाम धर्म का महत्त्व हृदय से नहीं स्वीकार किया । इस्लाम का जो कुछ प्रभाव उन
पर दिखाई पड़ता है वह अधिकतर परम्परागत संस्कार जनित और वातावरणमूलक
है। फिर भी मुसलमानों के एकेश्वरवाद तथा सूफी सन्तों के सर्वेश्वरवाद का प्रभाव
तत्कालीन साहित्य पर पड़ा । सूफियों के अनुसार यह संसार ब्रह्म कृत है । संसार में
उसी का स्वरूप प्रगट हुआ है । सूफियों ने यद्यपि माया को स्थान नहीं दिया फिर भी
शैतान के अस्तित्व को माना है जो जीव को भ्रम में डालकर ब्रह्म से मिलने में बाधा
पहुँचाता है ।
सन्त कवियों पर अन्य विचार-धाराओं का प्रभाव
साहित्य समाज का दर्पण होता है । वह अपने युग की प्रत्येक विचारधारा से
प्रभावित होता है । हिन्दी साहित्य के मध्ययुग के पूर्व, भारतवर्ष में अनेक दार्शनिक
विचार धाराओं का प्रचार था । जनता पर इन सभी सिद्धान्तों का मिले-जुले रूप में
प्रभाव पड़ा । फलतः इस काल में जो साहित्य रचा गया वह पूर्णतः धार्मिक साहित्य
रहा । साथ-साथ ब्रह्म, जीव, माया, जगत् आदि सम्बन्धी दार्शनिक विचारों की भी
विवेचना होती रही ।
सन्त कवियों पर कई विचार धाराओं का प्रभाव पड़ा । वे योग मार्ग, नाथ
पंथ, अद्वैतवाद, विशिष्टाद्वैत आदि सभी विचार धाराओं से प्रभावित हुए। उन्होंने
वेदान्त से ज्ञान तत्त्व, सूफियों से प्रेम तत्त्व, वैष्णवों से भक्ति तत्त्व, योगियों की बानियों
से सुरति निरत आदि शब्द अपना लिए । इस प्रकार सन्त काव्य में विशिष्ट दार्शनिक
सिद्धान्त नहीं मिलते वरन् सभी का मिश्रित रूप से उन पर प्रभाव पड़ा है ।
नामदेव पर अन्य दर्शनों एवं विचारधाराओं का प्रभाव
(क) वैष्णव परम्परा का प्रभाव
वैष्णव मत अत्यन्त प्राचीन मत है । भगवान् के विष्णु और उनके अवतारों
की उपासना ही इस मत की प्रमुखता है ।
विष्णु इस मत के परम आराध्य हैं । ऋग्वेद में विष्णु से सम्बन्धित सूक्त हैं।