सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 147, कुल 332 में से
संदर्भ में पढ़ेंचतुर्थ अध्याय
नामदेव की दार्शनिक विचारधारा
भारतीय दर्शन—आत्मा की श्रेष्ठता
आचार्यों द्वारा प्रतिपादित विभिन्न दार्शनिक सिद्धांत
विदेशी दार्शनिक सिद्धांतों का प्रभाव
संत कवियों पर अन्य विचार-धाराओं का प्रभाव
नामदेव पर अन्य दर्शन एवं विचार-धाराओं का प्रभाव
वैष्णव मत का प्रमुख उपादान—भक्ति तत्त्व
भगवान का लोकरक्षक एवं लोकरंजक स्वरूप
महाराष्ट्रीय वारकरी सम्प्रदाय
वारकरी सम्प्रदाय का उदय
वारकरी मत के सिद्धांत
(१) विट्ठल (२) भक्ति तथा अद्वैत ज्ञान (३) भगवत् रूप
वारकरी पंथ के सिद्धांत की विशेषता
नामदेव की रचनाओं में प्राप्त उनके दार्शनिक विचार
१. (अ) ब्रह्म (ब) ब्रह्म परंपरा (क) नामदेव का ब्रह्म वर्णन
२. जीवात्मा (आत्म दर्शन)—आत्म परंपरा—
(अ) जीव सम्बन्धी नामदेव के विचार
(ब) जीव और ब्रह्म का सम्बन्ध
(स) जीव की एकता और अद्वैतता
३. माया-माया की परंपरा
नामदेव का माया वर्णन
४. जगत्—जड़ जगत् का भौतिक स्वरूप
नामदेव का ऐहिक तत्त्व विचार
नामदेव का लौकिक जीवन विषयक दृष्टिकोण
अभेद भक्ति—अद्वैतपरक भक्ति कल्पना—
निर्गुण-सगुण की एकता—ज्ञानोत्तर भक्ति
सर्वं खलु इदं ब्रह्म—वात्सल्य भक्ति—
भक्ति और साधना सम्बन्धी व्यावहारिक विचार