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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 142, कुल 332 में से

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पृष्ठ 142

१४६ नामदेव की हिन्दी कविता
की वाणियो में मिलता है।
उलटवासियाँ
'उलटवासी' की व्युत्पत्ति का ठीक पता नही चलता । इसकी रचना का प्रमुख
उद्देश्य किसी बात का किसी विपरीत वा असाधारण कथन के द्वारा वर्णन करना है ।
तदनुसार 'उलटवासी' शब्द को भी 'उलटा' तथा 'वास' जैसे दो शब्दो को जोडकर
बनाया गया, माना जा सकता है। इस दशा में इसका तात्पर्य उस रचना से होगा
जिसमे किसी न किसी अश में उलटी बातें मिलती हो ।
नामदेव की अधिकांश आध्यात्मिक उक्तियाँ उलटवासियो के रूप में अभिव्यक्त
हुई हैं। उलटवासियो की शैली के कारण उनकी शुष्क और नीरस दार्शनिक उक्तियो में
एक विचित्र चमत्कार का समावेश हो गया है। चमत्कार काव्य का प्राण माना जाता
है। नामदेव की उलटवासियो में व्यंजना के विविध रूप भी परिलक्षित होते हैं। प्राय
सभी उलटवासियो मे एक विशेषता पाई जाती है। उनमें विरोध भावना के साथ
प्रतीक शैली और रूपक शैली का सुन्दर समन्वय दिखाई देता है।
अपनी एक उलटवासी में कहते है—'कितने अचरज की बात है कि पतुरिया
बज रही है और मादल नामक वाद्य नाच रहा है। अग्नि जल में डूब गया। छोटी
ब्याई और उसने हाथी को जन्म दिया। यह देखकर मुझे अचभा हुआ। मदमत्त हाथी
को तुरत काबू मे लाया गया। पंछी बिना पख के उड़ा और कुमुदिनी की डाली पर
जा बैठा। कड़वी निबोरी मुझे मीठी लगती है। मक्खी अपनी आँखों में अंजन आजने
लगी। नामदेव कहते हैं कि गुरु कृपा से जो खोजता है वह पाता है।'१
१. देवा पातुर बाजै मादल नाचे । येवढा अचभा दीठा ।
पूछौ पड़िया पडिता । जल बैसंदर बूठा ॥ टेक ॥
छोटी ब्याई हस्ती जाया । येवढा अचभा पाया ।
ऊभी ऊभी नाथीला । मैमत घूमत आया ॥ १ ॥
पांइन पषि बिनाहो उड़िया । कैर ढाली बैठा ।
नीव सदाफल सुफल फलिया । सो मोहि लागे मीठा ॥ २ ॥
ससे खोग मधे पुरी । भेड तडका काना ।
माषी काजन सारन लागी । ऐसा ब्रह्म गियन्ता ॥ ३ ॥
गाई बियाई बछो जाई । गाई बछो कूं धावै ।
प्रणवत नामदेव गुरु परसादे । जो खोजे सो पावै ॥ ४ ॥
—संत नामदेव की हिंदी पदावली, पद १०१ ।