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सर्वकोश
सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 13, कुल 332 में से

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पृष्ठ 13

नामदेव का ऐहिक तत्त्व विचार, नामदेव का लौकिक जीवन
विषयक दृष्टिकोण, अभेद भक्ति, अद्वैत परक भक्ति कल्पना, निर्गुण-
सगुण की एकता, ज्ञानोत्तर भक्ति, सर्वं खलु इदं ब्रह्म, वात्सल्य
भक्ति, भक्ति और साधना सम्बन्धी व्यावहारिक विचार।
पंचम अध्याय
नामदेव की रचनाओ का साहित्यिक मूल्यांकन १६५-२४२
भारतीय एवं पाश्चात्य विद्वानों के काव्य के प्रयोजन, सन्तों का
काव्यादर्श, काव्य के मूल्यांकन के दो प्रकार, नामदेव की कविता
का सामाजिक पक्ष, काव्य निर्मिति के प्रमुख कारण-(१) प्रतिभा,
(२) व्युत्पन्नता, (३) परिश्रम, (४) भावात्मकता। नामदेव की
कविता का भाव पक्ष, आत्मनिवेदनपरक काव्य, सन्त काव्य और
भक्ति, सन्त नामदेव की अभंग रचना, आर्तताः नामदेव के काव्य
का प्रेरणा स्रोत, साक्षात्कार की अनुभूति, नामदेव की कविता मे
रस : वात्सल्य, शान और करुणा। नामदेव की कविता का कला
पक्ष, गीति काव्य, नामदेव का अलंकार विधान, बिम्ब विधान,
नामदेव की छन्दो रचना, शैली। नामदेव का असाधारण कर्तृत्व,
नामदेव की हिन्दी पदावली की भाषा की कुछ विशेषताएं, वाक्य
रचना, शब्द क्रम, बल (Emphasis) - नामदेव की हिन्दी के कुछ
विशिष्ट प्रयोग, विशिष्ट व्याकरणिक रूपों का प्रयोग, संयुक्त
क्रियाओ का प्रयोग, नामदेव की हिन्दी पर अन्य भाषाओं का
प्रभाव, रूप रचना, सर्वनामो का प्रयोग, परसर्गों का प्रयोग,
ध्वनि।
षष्ठ अध्याय
नामदेव : हिन्दी काव्य धारा के प्रारम्भ कर्त्ता २४३-२८६
हिन्दी निर्गुण काव्य सम्बन्धी लेखन का परिचय, निर्गुण साहित्य
सम्बन्धी आलोचनात्मक ग्रन्थ, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओ मे प्रकाशित
निर्गुण मत सम्बन्धी आलोचनात्मक लेख, सन्त मत के प्रारम्भ
कर्त्ता के रूप में नामदेव के प्रति संकेत, नामदेव के निर्गुण धारा
के प्रारम्भ कर्त्ता न माने जाने के कारण, नामदेव की रचनाओ
का हिन्दी में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध न होना, कबीर का प्रखर