सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 12, कुल 332 में से
संदर्भ में पढ़ेंक्या बाल भक्त 'नामदेव डाकू थे ?'—गुरु नामदेव की यात्राएं,
नामदेव की समाधि, नामदेव का व्यक्तित्व । रचनाएं —मराठी
गाथा की प्रतियाँ, मराठी अभंगों का वर्गीकरण, हिन्दी रचनाएं,
हिन्दी की रचनाओं का विषयानुसार विभाजन ।
तृतीय अध्याय
नामदेव की हिंदी रचना में निर्गुण काव्य धारा की प्रवृत्तियां १०३-१५०
(१) निर्गुण सन्त काव्य-आध्यात्मिक प्रेरणा का काव्य
(२) निर्गुण सम्प्रदाय के रूप निर्धारण में प्रेरक तत्त्व, अद्वैतवाद,
इस्लाम या सूफ़ी मत, सिद्ध सम्प्रदाय, नाथ पथ, वैष्णव धर्म ।
(३) निर्गुण काव्य की प्रवृत्तियां और नामदेव का हिंदी काव्य,
निर्गुण भावना, गुरु महिमा, मूर्ति पूजा तथा बाह्याडम्बर का
खण्डन, एकेश्वरवाद का प्रतिपादन, कथनी तथा करनी में
एकरूपता, भक्ति और ऐहिक कार्य में एकता, सत्संग की
प्रधानता, सहज अवस्था, हठयोग, उलटबासियां ।
चतुर्थ अध्याय
नामदेव की दार्शनिक विचार-धारा १५१-१६४
भारतीय दर्शन, आत्मा की श्रेष्ठता, आचार्यों द्वारा प्रतिपादित विभिन्न
दार्शनिक सिद्धांत, विदेशी दार्शनिक सिद्धांतों का प्रभाव, सन्त कवियों
पर अन्य विचार-धाराओं का प्रभाव, वैष्णव मत का प्रमुख उपादान,
भक्ति तत्त्व, भगवान का लोक रक्षक एवं लोकरंजक स्वरूप । महा-
राष्ट्रीय वारकरी सम्प्रदाय, वारकरी सम्प्रदाय का उदय, वारकरी
मत के सिद्धांत —
( १ ) विट्ठल ( २ ) भक्ति तथा अद्वैत ज्ञान ( ३ ) भगवत् रूप ।
वारकरी पंथ के सिद्धांत की विशेषता, नामदेव की रचनाओं में
प्राप्त उनके दार्शनिक विचार—(१) ब्रह्म, ब्रह्म परम्परा, नामदेव
का ब्रह्म वर्णन—(२) जीवात्मा ( आत्म दर्शन )—आत्म परम्परा,
जीव सम्बन्धी नामदेव के विचार (३) जीव और ब्रह्म का सम्बन्ध
(४) जीव की एकता और अद्वैता । माया, माया की परम्परा,
नामदेव का माया वर्णन । जगत, जड जगत् का भौतिक स्वरूप ।