सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 14, कुल 332 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 14

व्यक्तित्व और उनके विचारो का प्रभाव, कबीर को क्रान्तिकारी
बनाने वाली परिस्थितियां, नामदेव और कबीर की रचनाओ की
तुलना, कर्म और वैराग्य का समन्वय, भेदभाव विहीनता, ब्रह्म की
निर्गुणता, अनन्य प्रेम भावना, सर्वात्मवाद और अद्वैत भावना,
निर्गुण भक्ति, नाम साधना, सेव्य सेवक भाव । सन्त नामदेव का
निर्गुण भक्ति की ओर झुकाव, आचार्य परशुराम चतुर्वेदी की
बताई हुई निर्गुण सन्तो की रचनाओ की विशेषताएँ, नामदेव की
रचनाओ से इन विशेषताओं के उदाहरण, नामदेव तथा कबीर का
काल, डॉ० मोहनसिंह 'दीवाना' का मत, कबीर का काल निर्णय,
डॉ० रामप्रसाद त्रिपाठी का मत, डॉ० राजनारायण मौर्य का मत,
डॉ० राममूर्ति त्रिपाठी का मत, निर्गुण पंथ के प्रवर्तक नामदेव ।
सप्तम अध्याय
नामदेव का तत्कालीन और परवर्ती साहित्य पर प्रभाव २६१-३२७
नामदेव की पंजाब यात्रा का रहस्य, पंजाब की तत्कालीन परि-
स्थिति, नामदेव की महत्ता और उनकी रचनाओ का प्रसार, मध्य-
युगीन नव जागरण के प्रणेता नामदेव, नामदेव का व्यक्तित्व,
नामदेव की रचनाओ का प्रसार, हिंदी काव्य रचना का प्रयोजन,
सिद्ध सम्प्रदाय और नाथ पन्थ, सिद्धो तथा नाथो का नामदेव पर
प्रभाव, नामदेव के समकालीन सन्त, नामदेव का परवर्ती साहित्य
पर प्रभाव, ईश्वर की सर्वव्यापकता, प्रत्यक्ष अनुभव से सत्यान्वेषण,
सद्गुरु-महत्त्व प्रतिपादन, सुमिरन, नामस्मरण का महत्त्व, बाह्या-
चार की व्यर्थता, अनन्य प्रेम भावना, कर्म और अध्यात्म भावना
का समन्वय, भेदभाव विहीनता, ब्रह्म की निर्गुणता, करनी तथा
कथनी में एकता, भक्त की भगवान के प्रति मिलन उत्कंठा ।
उपसंहार ३२८-३३३
संदर्भ ग्रंथ सूची ३३४-३४०