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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 112, कुल 332 में से

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पृष्ठ 112

११६ नामदेव की हिन्दी कविता
यह निश्चित है कि बिना गुरु प्रसाद के कुछ प्राप्त नही होता ।¹
सद्गुरु की कृपा से ही नामदेव ने साधु का जीवन ग्रहण किया ।²
'गुरु कृपा से जीव के सभी संशय मिट जायेंगे, वह यम यातना से मुक्त हो
जायेगा। उसे निर्वाण पद प्राप्त होगा। गुरु को छोड़कर वह कहो अन्यत्र न जायेगा।
नामदेव कहते हैं कि में तो केवल गुरु ही की शरण में जाऊँगा जिससे सभी प्रकार का
हित संभव है।'³
ईश्वरोन्मुखता के कारण नामदेव का जीवन सफल हो गया जिससे दुख के
स्थान पर वह सुख की अनुभूति हुई है।⁴
अपने एक कूटामक पद में नामदेव कहते हैं कि सद्गुरु ने उनको निर्वाण पद
का मार्ग बताया ।⁵
अपने गुरु विसोबा खेचर का उन्होंने बड़ी श्रद्धा से स्मरण किया है। कहते हैं कि
उनके कृपा-प्रसाद ही से मैने तुलसी की माला पाई। उन्होंने सदगुर होकर मुझे परम
तत्त्व का साक्षात्कार कराया।⁶
१. प्रणवत नामदेव गुर प्रसादे। पाया तिनही सुहावा ॥
—संत नामदेव की हिंदी पदावली, पद ६४।
२. गुरु के मेहेर रो नामा भए साधु ।
देखत रौ लगे जन हे भोदु ॥
—सत नामदेव की हिंदी पदावली, पद १८५।
३. जउ गुरदेव त संसा टूटे।
जउ गुरदेउ त भउ जल तरे।
जउ गुरदेव न जनमि न मरे।
बिनु गुरु देउ अवर नही जाई।
नामदेउ गुरु की सरनाई।
—संत नामदेव की हिन्दी पदावली, पद २१६।
४. सफल जनमु मोकउ गुरु कीना।
दुख बिसारि सुख अंतरि लीना ॥
—सत नामदेव की हिंदी पदावली, पद २०४।
५. सत् गुरु कथीया पद निरवाना।
—सत नामदेव की हिंदी पदावली, पद ७६।
६. खचर भूचर तुलसी माला गुर परसादी पाइआ।
नामा प्रणवे परम तव है सति गुर होइ लखाइआ ॥
—संत नामदेव की हिंदी पदावली, पद २०६।