संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)
Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा
पृष्ठ 85, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंअन्नप्राशनप्रकरणम् ८९
ओम् प्राणाय त्वा जुष्टं निर्वपामि ॥ १ ॥
ओम् अपानाय त्वा जुष्टं निर्वपामि ॥ २ ॥
ओम् चक्षुषे त्वा जुष्टं निर्वपामि ॥ ३ ॥
ओम् श्रोत्राय त्वा जुष्टं निर्वपामि ॥ ४ ॥
ओम् अग्नये स्विष्टकृते त्वा जुष्टं निर्वपामि ॥ ५ ॥
इन पाँच मन्त्रों से कार्यकर्त्ता यजमान और पुरोहित तथा
ऋत्विजों को पात्र में पृथक्-पृथक् देके पृष्ठ ३०-३५ में लिखे
प्रमाणे अग्न्याधान, समिदाधानादि करके प्रथम आघारावाज्य-
भागाहुति चार और व्याहृति आहुति चार मिलके ८ घृत की
आहुति देके, पुनः उस पकाये हुए भात की आहुति नीचे लिखे
हुए मन्त्रों से देवे—
दे॒वीं वाच॑मजनयन्त दे॒वास्तां वि॒श्वरू॑पाः प॒शवो॑ वदन्ति ।
सा नो॑ म॒न्द्रेष॒मूर्जं॒ दुहा॑ना धे॒नुर्वाग॒स्मानुप॒ सुष्टुतैतु॒ स्वाहा॑ ॥
इदं वाचे—इदन्न मम ॥ १ ॥
वाजो॑ नो॒ऽअद्य प्र सु॑वाति॒ दानं॒ वाजो॑ दे॒वाँऽऋ॒तुभि॑: कल्पयाति ।
वाजो॑ हि मा॒ सर्व॑वीरं ज॒जान॒ विश्वा॒ऽआशा॒ वाज॑-
पतिर्जयेयु॒थ्ंस्वाहा॑ ॥ इदं वाचे वाजाय—इदन्न मम ॥ २ ॥
इन दो मन्त्रों से दो आहुति देवें। तत्पश्चात् उसी भात
में और घृत डालके—
ओं प्राणेनान्नमशीय स्वाहा ॥ इदं प्राणाय—इदन्न मम ॥ १ ॥
ओमपानेन गन्धानशीय स्वाहा ॥ इदमपानाय—इदन्न मम ॥ २ ॥
ओं चक्षुषा रूपाण्यशीय स्वाहा ॥ इदं चक्षुषे—इदन्न मम ॥ ३ ॥
ओं श्रोत्रेण यशोऽशीय स्वाहा ॥ इदं श्रोत्राय—इदन्न मम ॥ ४ ॥
इन मन्त्रों से चार आहुति देके (ओं यदस्य कर्मणो०)
पृष्ठ ३३ में लिखे प्रमाण स्विष्टकृत् आहुति एक देवे। तत्पश्चात्