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संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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सामान्यप्रकरणम् ३५
ओम् इ॒मं मे॑ वरुण श्रु॒धी हव॑म॒द्या च॑ मृळय।
त्वाम॑व॒स्युराच॑के॒ स्वाहा॑॥ इदं वरुणाय—इदं न मम॥ ३॥
—ऋ० मं० १। सू० २५। मं० १९॥
ओं तत्त्वा॑ यामि॒ ब्रह्म॑णा॒ वन्द॑मान॒स्तदा शा॑स्ते॒ यज॑मानो
ह॒विर्भि॑:। अहे॑ळमानो वरुणे॒ह बो॒ध्युरु॑शंस॒ मा न॒ आयु॒: प्र
मौषी॒: स्वाहा॑॥ इदं वरुणाय—इदं न मम॥४॥
—ऋ० मं० १। सू० २४। मं० ११॥
ओं ये ते शतं वरुण ये सहस्रं यज्ञियाः पाशा वितता
महान्तः। तेभिर्नो अद्य सवितोत विष्णुर्विश्वे मुञ्चन्तु मरुतः
स्वर्काः स्वाहा॥ इदं वरुणाय सवित्रे विष्णवे विश्वेभ्यो
देवेभ्यो मरुद्भ्यः स्वर्केभ्यः—इदं न मम॥५॥
ओम् अयाश्चाग्नेऽस्यनभिशस्तिपाश्च सत्यमित्त्वमया
असि। अया नो यज्ञं वहास्यया नो धेहि भेषजꣳ स्वाहा॥
इदमग्नये अयसे—इदं न मम॥ ६ ॥
ओम् उदु॑त्त॒मं व॑रुण॒ पाश॑म॒स्मदवा॑ध॒मं वि म॑ध्य॒मं श्र॑थाय।
अथा॑ व॒यमा॑दित्य व्र॒ते तवाना॑गसो॒ अदि॑तये स्याम॒ स्वाहा॑॥
इदं वरुणायाऽऽदित्यायाऽदितये च—इदं न मम॥७॥
—ऋ० मं० १। सू० २४। मं० १५॥
ओं भवत॑न्नः॒ सम॑नसौ॒ सचै॑तसावरे॒पसौ॑। मा य॒ज्ञꣳ हि॑ꣳसिष्टं
मा य॒ज्ञप॑तिं जातवेदसौ शि॒वौ भ॑वत॒मद्य न॒: स्वाहा॑॥
इदं जातवेदोभ्याम्—इदं न मम॥८॥ —युजः० ५।३
सब संस्कारों में मधुर स्वर से मन्त्रोच्चारण यजमान ही
करे। न शीघ्र न विलम्ब से उच्चारण करे, किन्तु मध्यभाग