समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)
Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary
आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - 9
प्रज्ञा से भेद-विज्ञान होता है -
जीवो बंधो य तहा छिज्जंति सलक्खणेहि णियदेहिं।
पण्णाछेदणएण दु छिण्णा णाणत्तमावण्णा॥ (9-7-294)
जीव तथा बन्ध ये दोनों अपने-अपने निश्चित लक्षणों के द्वारा पृथक् किये जाते हैं।
प्रज्ञा रूपी छुरी के द्वारा छेदे हुए (पृथक् किये हुए) ये नानारूप हो जाते हैं (पृथक्
हो जाते हैं)।
The Self and the karmic bondage are differentiated on the basis
of their own intrinsic nature. These two are chiselled
(separated) with the help of the instrument of self-
discrimination.
भेद-विज्ञान होने पर जीव का कर्त्तव्य -
जीवो बंधो य तहा छिज्जंति सलक्खणेहि णियदेहिं।
बंधो छेदेदव्वो सुद्धो अप्पा य घेंत्तव्वो॥ (9-8-295)
जीव तथा बन्ध अपने-अपने निश्चित लक्षणों के द्वारा पृथक् किये जाते हैं। वहाँ बन्ध
को तो (आत्मा से) पृथक् कर देना चाहिये और शुद्ध आत्मा को ग्रहण करना
चाहिये।
The Self and the karmic bondage are differentiated (and
separated) on the basis of their own intrinsic nature. The karmic
bondage should be discarded and the pure soul ought to be
realized.
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