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सर्वकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

पृष्ठ 40, कुल 68 में से

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३८ रुद्रयामलतन्त्रम्
छपखुदियाकीटकमजामूत्रेण पिष्टितम् ॥
ताम्बूलेनखादयेद्यंनपुंसकत्वमाप्नुयात् ॥ ६५ ॥
छपुखुदियाकिरवा छेरीके मूत्रमें पीसकर ताम्बूलके संग पिलावे तो
नपुंसक होय ॥ ६५ ॥
कृष्णतिलं गोक्षुरं च ह्यजादुग्धेन क्वाथितम् ॥
शीतं कृत्वा च खादेच्च तदा शुद्धो पुनः पुमान् ॥ ६६ ॥
कृष्ण तिल और गोखरूका छेरीके दूधमें क्वाथ कर जब शीतल होय
तब खाय तौ फिर पुरुष होय ॥ ६६ ॥
गोरोचनंनवनीतंखादयेच्चापि मिश्रितम् ॥
नपुंसको भवेच्चैव यावज्जीवो न शुद्ध्यति ॥ ६७ ॥
गोरोचनमें नैनू मिलाकर खावे तौ जबतक जीवे तबतक नपुंसक
होय ॥ ६७ ॥
धत्तूरफलं शर्करां क्षभयेद्याति शुद्धताम् ॥ ६८ ॥
धतूरेका फल और शर्करा खाय तो शुद्ध होय ॥ ६८ ॥
भगबंधनम् ।
श्वेतगौदरिधूलिं च प्रमदापादतलस्य च ॥
वामस्य च समादाय लेपाद्याति च गाढताम् ॥ ६९ ॥
सफेद गौदरि और स्त्रीके वाम पादकी धूलि ले लेपन करे तो भग गाढा
होय ॥ ६९ ॥
मंत्रः । ॐ अमुकभगबंधनं विस्फुरनं ध्रुव श्रोनितम् ।
नागवल्लीदलं मंत्रैः सप्तवारं च मंत्रितम् ॥
तद्रसे मर्दयेद्योनि दृढीभूता न संशयः ॥ ७० ॥