रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)
Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary
भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दीटीकासहितम् ३९
मूल मंत्रको सात वार पढकर ताम्बूलदलोंका रस काढकर योनिपर
लेपकर मर्दन करे तो योनि दृढ होय ॥ ७० ॥
मंत्रः । ॐ चिटोचिटीसाचिटोस्वाचिटीठः ठः ।
स्मशानवस्त्रं धावयेद्गोदुग्धचंदनेन वा ।।
मंत्रेण च समालेपान्न लिंगं जायतेदृढम् ॥ ७१ ॥
चिताका कपडा गौके दूधसे धोवे और चंदनसे लपेटकर मंत्र
पढकर लिंगमें लपेटे तो लिंग दृढ न होय ॥ ७१ ॥
सप्तवारं च मंत्रेण पानीयं चापियोपिबेत् ॥
प्रातःकाले तदा चैव न भवेद्दोषतत्कृतम् ॥ ७२ ॥
प्रातःकालमें सात वार मंत्र पढकर पानी पीवे तो शुद्ध होय ॥ ७२ ॥
मंत्रः । ॐ वज्र कष्टीवज्रकीवार वज्रमें बाँधौ
दसमे धार वज्र पानीमै पियौतौ डाइनि
डाकिनी ना छिवै जाघचापोकालीसी
अन्यत्र ब्रह्माकी धीयासिसुडाकिनीमाकरवो
मोरै जीव भाति करै चलै पानी करै
ग्रहज करै पानी करै सुनैकैरहासी करै न-
यन कटाक्ष करै अपनी हथेरी बडै सवारै
किलनि पोतली आनि पतिया मोहै न लागै
मइ करै ताकौ मरन्न कपरैहूँ मोसिद्धिगुरुगुह
पाइश्रीमहादेवकी आज्ञा । क्लेशनिवारणम् ।