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सर्वकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

पृष्ठ 23, कुल 68 में से

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पृष्ठ 23

हिन्दीटीकासहितम् २१
परैतसारु ।। अग्निस्तंभनम् । ॐ ह्रौं महि
षवाहिनी जेभय मोहय छेदय अग्निस्तंभय
अग्नि अग्निस्तंभय ठः ठः श्रीमहादेवकी
आग्या हनुमानकी आग्या नारायण
सूर्यकी आग्या ।। मंत्रेदं दशसहस्रं जप्त्वा
सिद्धिमवाप्नुयात् ।। ९२ ।।
अग्नि रोकनेका मंत्र पढ़े तो तेलमें न जरे, दूसरा मंत्र दश हजार जपे तो
सिद्धि होय ॥९२॥
मंत्रः । ॐ तता तता अंगरी हेमपथक्रीकि-
वारी महिद्रसीशलं गोर महादेवकी आ-
ग्या । ॐ नमो कंबल कोषिलनिद्रुपति
काढ़ि जलेसलै पूर्वते कतारनु महादेवकी
पूजा खाय पाय तेलै । ॐ अग्नि ववरतिको
धरै मै धरौ गलहंथ्य वाम माया यौनकी-
जो सो कीन्हो हंथ्य जलय प्रजलपदमयं-
येय आवैजः महादेवकी पूजा पावै पाय-
डालै जः । ॐ अग्नि जलतीमें धरि जहा
हर दीन्हो हथ्यं वैमैस्वाद रथ भियौदै ना-
रायण साखीश्रीसूर्यकी आग्या अग्निकुं-
ड ब्रह्मांड जला ऊपर आनौ पानीरेला
आनि वैस्वादर नाचौ मेरी आदिनाथके
जभमरो जी महंमद । ॐ हंगुरुगतीसै लि-