सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिमञ्जरी (कवि जयदेव - कामशास्त्र एवं शृंगार-रस लक्षण सटीक)

रतिमञ्जरी (कवि जयदेव - कामशास्त्र एवं शृंगार-रस लक्षण सटीक)

Ratimanjari of Kavi Jayadeva with Hindi Commentary

कवि जयदेव (सम्पादक: पण्डित रामदत्त शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished18 पृष्ठ

पृष्ठ 5, कुल 18 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 5

४ रतिमञ्जरी-
कामोत्सुका गाढरतिप्रिया या
नितान्तभोक्त्री करिणी मता सा ॥७॥
टी०—अब हस्तिनी स्त्री का लक्षण कहते हैं:—जो स्त्री पुष्ट अधर
वाली हो, पुष्ट नितम्ब ( कटिपश्चाद्भाग ) शाली हो, मोटी ( पुष्ट )
अङ्गुली वाली हो, पुष्ट स्तन वाली हो, सुन्दर स्वभाव वाली हो, कामके
विषय में उत्साह वाली हो, दृढ़ रति प्रिय हो, अतिशय भोग करने वाली
हो, वह स्त्री हस्तिनी है ॥ ७ ॥
अथ तासां सन्तोषकरान् पुरुषानाह—
शशके पद्मिनी तुष्टा चित्रिणी रमते मृगे ।
वृषभे शङ्खिनी तुष्टा हस्तिनी रमते हये ॥ ८ ॥
टी०—अब उक्त चतुर्विध स्त्रियों को जिन पुरुषों से सन्तोष होता है
सो कहते हैं—पद्मिनी स्त्री शश नाम पुरुष में सन्तुष्ट होतो है । चित्रिणी
स्त्री मृग नाम पुरुष में रमण करती है । शङ्खिनी स्त्री वृषभ नाम पुरुष में
सन्तुष्ट होती है । और हस्तिनी स्त्री हयनाम पुरुष में रमण करती है ॥८॥
अथ स्त्रीजातिचतुष्टयलक्षणम्—
पद्मिनी पद्मगन्धा च मीनगन्धा च चित्रिणी ।
शङ्खिनी क्षारगन्धा च मदगन्धा च हस्तिनी ॥ ९ ॥
टी०—पद्मसदृश गन्धवाली पद्मिनी स्त्री होती है । मीन सदृश गन्ध
वाली चित्रिणी स्त्री होती है । खार सदृश गन्ध वाली शङ्खिनी स्त्री होती
है । मदके सदृश गन्ध वाली हस्तिनी स्त्री होती है ॥ ९ ॥
[श्लो० ७] स्थूलोऽधरो यस्याः सा । स्थूलो नितम्बभागो यस्याः सा । स्थूला-
ऽङ्गुलिर्यस्याः सा । स्थूलौ कुचौ यस्याः सा । सुष्ठु शोभनः शीलो यस्याः सा । कामे
उत्सुका कामोत्सुका । गाढा रतिः प्रिया यस्याः सा । नितान्तं भोक्त्री नितान्तभोक्त्री ।
[ श्लो० ९ ] पद्मवत् गन्धो यस्याः सा । मीनवत् गन्धो यस्याः सा । क्षीरवत्
गन्धो यस्याः सा । मद इव गन्धो यस्याः सा ।