रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६४ असली कोकशास्त्र
काकसत्वा स्त्री
दृष्टिं मुहुर्भ्रमयति प्रबलाशनात्ति ।
रुद्धं गमेति विपुलां किल काक सत्वा ॥
इधर-उधर बार बार देखने वाली, अधिक घूमने वाली, सर्वदा
कौए के समान क्षुधातुर रहने वाली स्त्री काकसत्वा कहलाती है ।
-:०:-
बानरसत्वा स्त्री
उद्भ्रान्तदृक्करजदन्तरणप्रसक्ता ।
स्याद्वानरप्रकृतिरस्थिरचित्तवृत्तिः ॥
जिसकी दृष्टि पागल की भांति चंचल हो, जिसके दाँत और
नख तीखे हों, वह बानर के समान चंचल स्वभाव वाली स्त्री
बानरसत्वा कहलाती है ।
-:०:-
गर्दभसत्वा स्त्री
या दृष्टविप्रियवचोरचना च नारी ।
रक्त विटप प्रहरणे खर सात्विका सा ॥
व्यर्थ बकवाद करने वाली, कामुकी, बुद्धिहीना गर्दभ के समान
स्वभाव वाली स्त्री गर्दभसत्वा कहलाती है ।