रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ६५
योग्यायोग्य जोडे
सामान्ये नरनारीणां गर्भाधानं च जायते ।
हीनाधिक्येऽप्रजत्वं च कृशत्वं च परस्पस्परात् ॥
समान बल और क्रिया वाले स्त्री पुरुषों का संयोग उत्तम
सन्तान उत्पन्न कर सकता है। हीन बल क्रिया वालों का संयोग
गुण हीन, बल हीन, रोगी, अल्पायु सन्तान उत्पन्न करने वाला
होता है । इस लिए चाहिए कि शास्त्र मदानुसार जैसे स्त्री पुरुषों
का मिलन कहा गया है, वैसों का ही संयोग मिलाना चाहिए ।
कौन स्त्री किस पुरुष से सन्तुष्ट होकर सुखी होती है अब यह
बतलाया जाता है ।
शशकं पद्मिनी तुष्टा चित्रिणी रमते मृगम् ।
वृषभं शंखिनी तुष्टा हस्तिनी रमते हयम् ॥
शशक लक्षण-युक्त पुरुष पद्मिनी लक्षण वाली स्त्री से सन्तुष्ट
होता है तथा पद्मिनी शशक से । चित्रिणी मृग परस्पर एक दूसरे
से सुखी होते हैं । वृषभ संज्ञक पुरुष शंखिनी और हय-संज्ञक
हस्तिनी से सन्तुष्ट होते हैं । इस लिए इनका जोड़ा बुद्धिमानों को
मिलाना चाहिए । विपरीत योग मिलाने से हानि होती है ।
पद्मिनी मृग योग
मृग संज्ञक पुरुष के साथ यदि पद्मिनी का योग मिला दिया
जाय तो उससे उत्पन्न पुत्र बलवान होगा किन्तु पूर्ण सुखी न