रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
पृष्ठ 94, कुल 440 में से
संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ६३
नागसत्वा स्त्री
श्वसिति बहुतरं या जृम्भते भ्रन्तिशीला ।
स्वापितसततमेव व्याकुला नागसत्वा ॥
सुशीतल श्वास लेने वाली, अधिक घूमने वाली, जम्भाई और
अंगड़ाई लेने वाली, अधिक काल तक सोने वाली, सर्प की भाँति
चंचल स्वभाव वाली स्त्री नागसत्वा कहलाती है ।
गन्धर्वसत्वा स्त्री
अपेतरुषोज्ज्वलदीप्तिवेषांस्रग्गन्धधूपादिषुबद्धरागाम्
सङ्गीतलीलाकुशलां कलज्ञांगन्धर्वसत्वां युवतींवदन्ती
क्रोधयुक्ता, स्वच्छ वस्त्र धारिणी, सुगन्धित पुष्पमाला धारिणी,
वेष-भूषा चाहने वाली, गाने बजाने में कुशल, अनेक तरह की कला
जानने वाली स्त्री गन्धर्व सत्वा कहलाती है ।
पिशाचसत्वा स्त्री
मनोजिह्मनाऽतिब हुभुक् प्रकटोष्णगात्री ।
भुङ्क्ते च मद्य पललादि पिशाच सत्वा ॥
निराभिमानिनी अनेक तरह के बहुत पदार्थ खाने वाली, तथा
गर्म शरीर वाली, मांस और शराब में विशेष रुचि रखनेवाली स्त्री
पिशाच सत्वा कहलाती है ।