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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 93, कुल 440 में से

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पृष्ठ 93

६२ असली कोकशास्त्र
देवसत्वा स्त्री
सुरभिशुचिशरीर-सुप्रसन्नानना च ।
प्रचुरधनजनाढ्यां भामिनी देवसत्वा ॥
सुगन्धि से पवित्र देह वाली, सुप्रसन्नमुखी, धन-धान्य सम्पन्ना,
बड़े कुटुम्ब वाली, देव स्वभाव वाली स्त्री देवसत्वा कहलाती है ।
—०—
यक्षसत्वा स्त्री
व्यपगतगुरुलज्जोद्यानपानार्णवाद्रौ ।
स्पृहन्ति रातिसिद्धयै रोक्षणा यक्ष सत्वा ॥
माता, पिता और गुरुजनों के सम्मुख निर्लज्जता पूर्वक बर्तने
वाली, समुद्र, पर्वत और वनादि स्थानों में सम्भोग चाहने वाली,
क्रोधयुक्ता स्त्री यक्षसत्वा कहलाती है ।
—०—
मनुष्य सत्वा स्त्री
भवति सरलचित्ता दक्षिणातिथिषुरक्ता ।
स्फुटमिहनरसत्वा खिद्यते नोपवासैः ॥
सरल स्वभाव वाली, चतुरा, अतिथि-पूजिका, उपवास न
चाहने वाली, स्त्री मनुष्यसत्वा कहलाती है ।
—०—