रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ६१
२—जिसकी ग्रन्थी, गुल्म, हड्डी से बाहर दिखायी देते हों,
गरम अंग वाली, पित्त प्रकृतिका स्त्री कहलाती है ।
३—रूखे, उष्ण, शीतल, शरीर वाली, बहुभाषिणी स्त्री वात
प्रकृतिका कहाती है ।
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स्त्रियों के त्रिगुणात्मक भेद से
तृप्ति लक्षण
अचिरलघुचिरोच्चैः कालभावावसानाः,
प्रमददहनगाढद्वारगुह्या क्रमेण ।
सततशिशिरकालोपेतहेमन्त वर्षा-
मधुषु निधुवनेच्छा संप्रदागे प्रदिष्टा ॥
१—कफ प्रकृति वाली नारी जल्दी तृप्त होनेवाली तथा बहुत
रज गिराने वाली होती है ।
२—पित्त प्रकृति वाली स्त्री कफ प्रकृति वाली से अधिक काल
में छूटने वाली तथा उसकी योनि गर्म होती है ।
३—वात प्रकृति वाली स्त्री सिकुड़ी हुई योनि वाली, तथा
बहुत देर में बहने वाली होती है ।
कफ प्रकृति वाली शिशिर और वसन्त में, पित्त प्रकृति वाली
वर्षा और शरद में वात प्रकृति वाली वसन्त और ग्रीष्म में सम्भोग
में हितकर होती हैं ।