रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ८५
शंखिनी स्त्री
दीर्घा सुदीर्घनयना वरसुन्दरी या कामोप-
भोगरसिका गुणशीलयुक्ता ।
रेखात्रयेण च विभूषितकण्ठदेशा सम्भोग-
केलिचतुरा किल शंखिनी सा ॥
विशाल नेत्रा, शारीरिक सब अंगों से सुन्दर, काम और उप-
भोग की महिमा को जानने वाली, शील गुण युक्त कण्ठ में तीन
रेखा वाली, लम्बी, सम्भोग में चतुरा स्त्री शंखिनी कहलाती है।
भवति कमलनेत्रा शीलयुक्ता च दीर्घा ।
कठिन घन कुचाढ्या शांखिनी क्षारगन्धा ॥
मधुर वचनयुक्ता कण्ठदेशे त्रिरेखाम्-
कथितमिदमशेषं लक्षणं शास्त्रयुक्तम् ॥
कमल के समान दोनों नेत्र वाली, लम्बी देह वाली, कठोर स्तन
वाली, मधुर भाषिणी, शील स्वभाव युक्ता, जिसकी देह से क्षार
गन्ध आती हो, तथा जिसके कण्ठ देश में तीन रेखायें पड़ी हों,
वह शंखिनी कहाती है।
तनुरतनुरपि स्याद्दीर्घ देहाऽङ्घ्रिमध्या ।
ह्यरुण कुसुमवासः काङ्क्षिणीकोपशीला ॥
अनिभृत शिरमंगे, दीर्घ निम्नंवहन्ती ।
स्मरगृहमतिलोम क्षारगन्धि स्मराम्बु ॥