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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 85, कुल 440 में से

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८६ असली कोकशास्त्र
जिसके हाथ, पैर और शरीर के प्रत्येक अंग लम्बे मोटे और
पतले भी हों, लाल रंग के पुष्प और वस्त्र चाहती हो। क्रोधी स्वभाव
वाली, तथा असमान अंग वाली स्त्री शंखिनी कहलाती है ।
सृजति बहुनखांकं संप्रयोगे लघीयः ।
स्मरसलिलपृषत्का किंचिदुत्तप्तगात्री ॥
न लघु न बहु भोक्त्री प्रायशः पित्तलास्यात् ।
पिशुन मलिन चित्ता शङ्खिनी रासभोक्तिः ॥
जिसका शरीर कुछ गर्म हो, सामान्य खाने वाली, चुगलखोर
गर्दभ स्वर वाली, रति के समय बहुत नख गड़ाने वाली, स्वल्प
रज त्यागिनी, पित्त प्रकृति वाली स्त्री शंखिनी कहलाती है ।
—:*:—
हस्तिनी स्त्री
भवति मदन-दग्धा हस्तिनी स्थूल देहा ।
नयन-दहन-रक्ता मद्य गन्धाल्पकेशी ॥
कठिनन-कुचाढ्या नासिका स्थूल रन्ध्रा ।
पुलकित सकलांगी सर्वदा काम दग्धा ॥
हाथी के समान स्थूल देह वाली, मदमती, अग्नि सदृश रक्त
नेत्र वाली स्वल्प केशा, घन सदृश कठिन स्तन द्वय वाली, नाक
के स्थूल छिद्र वाली हमेशा मद गन्ध वाली, सदैव काम ताप से
पुलकित अंग वाली स्त्री हस्तिनी कहलाती है ।