रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८४ असली कोकशास्त्र
दृष्टि चपला, आलिंगन, चुम्बनादि बाह्य सम्भोग रत, रंगीन
चित्र विचित्र वस्त्रों को धारण करने वाली, पुष्पमाला, आभूषणादि
विशेष चाहने वाली स्त्री चित्रणी कहलाती है ।
सुगतिरनतिदीर्घा नातिखर्वा कृशाङ्गी ।
स्तनजघन-विशाला काकजङ्घोन्नतोष्ठी ॥
मधु सुरभिरताम्बुः कम्बु-कण्ठी चकोर-
स्वरवचन विभागा नृत्यगीतादि विज्ञा ॥
समान कद वाली, जिसके कुच बड़े और जंघाएँ बड़ी होती हैं,
कौए के समान लम्बी जाँघ वाली, ऊँचे ओठ, कम्बु ग्रीवा, गायन
कलाओं के जानने वाली, सुन्दरी चित्रणी कहलाती है ।
कठिन घन कुचाढया नातिदीर्घा मनोज्ञा ।
रतिरस-गुणयुक्ता सुन्दरी नातिखर्वा ॥
कमलनयन युग्मा लोभहीना सुशीला ।
तिलकुसुम समानां नासिका चित्रिणी सा ॥
जिसके स्तन द्वय कठिन और मिले हुए हों, शरीर की लम्बाई
सामान्य हो, कमल सदृश नेत्र, लोभ रहित, तिल पुष्प के समान
नासिका, सुशील, रति गुण युक्त, नारी चित्रणी कहाती है ।