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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 82, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र ८१
अंग वाली, परहित बुद्धि रखने वाली, पद्म गन्धा स्त्री पद्मिनी
कहाती है।
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चित्रिणी स्त्री
यस्या मनो न चलति कर्हिचित्त प्रलोभनैः ।
सत्यं प्रियञ्च वदति सर्वदा मिष्टभाषिणी ॥
दया क्षमावती या हि देवपूजा परायणा ।
पत्यौ परायणा या हि नेक्षते परपूरुषम् ॥
विप्रभक्ता च या नारी प्रीतास्यात् स्वल्प-मैथुने ।
सदा धर्मे मतिः यस्याश्चित्रिणी सा प्रकीर्त्तिता ॥
जिसका मन कभी प्रलोभनों में न फँसने वाला हो, जो हमेशा
प्रिय, मधुर, सत्य बोलने वाली हो, दया ओर क्षमा की साक्षात्
मूर्ति हो, देव और पति पूजा में तत्पर रहने वाली, परपुरुष को न
देखने वाली थोड़े मैथुन में तृप्त हो जाने वाली, हमेशा धर्म में मति
रखने वाली स्त्री चित्रिणी कहलाती है ।
मदनसदनमस्या वर्तूं लोच्छूनमन्त-
मृदुमदनजलाढ्यं रोमभिर्नातिसान्द्रैः ॥
प्रकृति चपलदृष्टिर्वाह्य सम्भोगरक्ता ।
रसयतिमधुराल्पं चित्रिणी चित्ररक्ता ॥