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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 81, कुल 440 में से

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८२ असली कोकशास्त्र
मृदुशुचिलघु भुङ्क्ते मानिनी गाढ़-लज्जा ।
धवल-कुसुम-वासा वल्लभा पद्मिनीस्यात् ॥
राज हंस के समान गति वाली, पतली कमर वाली, त्रिवली
युक्त हंस के तुल्य जिसकी वाणी हो, मुलायम, पवित्र, और स्वतंत्र
भोजन करने वाली, सफेद पुष्प और वस्त्रों को प्यार करने वाली
पद्मिनी कहाती है ।
अमल मुकुल मृद्वी फुल्लराजीवगन्धः ।
सुरतपयसि यस्या सौरभं दिव्यमङ्गे ॥
चकित-मृगदृशाभे प्रान्तरक्ते च नेत्रे ।
स्तनयुगलमनर्घ्यं श्रीफल श्रीविडम्बि ॥
कमल के समान कोमल अन्तःकरण वाली, पद्म गन्ध सदृश
गन्ध वाली हिरणी के समान सचकित नेत्र वाली, और जिसकी
दोनों आँखों के कोने लाल हों, तथा जिसके कुच-द्वय विल्व फल के
समान गोल और कठोर हों, ऐसे लक्षण युक्त स्त्री पद्मिनी होती है ।
कमल-नयन-युक्ता क्षुद्ररन्ध्रा च नासा ।
कृशतनु मृदुवाणी दीर्घ-केशी सुभाङ्गी ॥
परहित-मतियुक्ता पद्मगन्धा सुवेषा ।
अविरल कुचयुग्मा कीर्त्तिता पद्मिनी सा ॥
कमल सदृश विशाल नेत्र वाली, जिसके नाक के छेद छोटे
हों, केश लम्बे लम्बे, पतला शरीर, कोमल मृदुवाणी, सुन्दर सुडौल