रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७८ असली कोकशास्त्र
मधुर भाषी, ईर्ष्यालु स्वभाव वाला जिसकी आँखें चञ्चल विशाल हों,
और अधिक सोना पसन्द करता हो, उसे अश्व संज्ञक पुरुष कहते हैं।
गम्भीरांमधुरां गिरं द्रुतिगतिं
पीनोरुकौ विश्रुतो,
दीप्ताग्निप्रमदारतः शुचिगिरो
रेतोऽस्थिधातूर्ज्ज्वला ।
तृष्णात्र्त्ता नवनीतशीत बहुल
च रस्मरांबुद्रवा,
लिङ्गै र्द्वादशकांगुलैर्निगदिता
अश्वाः समोरस्थलाः ॥
गम्भीर, मधुर बोलने वाला, शीघ्रगामी, मोटी जाँघों वाला
दीप्ताग्नि स्त्रियों में रत रहने वाला, सत्य प्रिय, जिसका वीर्य हड्डी
से अधिक सफेद हो, सम वक्षस्थल वाला, पुरुष अश्वसंज्ञक होता है ।
स्थूलाङ्गश्चोग्रभाषश्च निद्रां न भजते क्वचित् ।
दिवा-रात्रि सदा तिष्ठेत् नारी दर्शन-लालसः ॥
स्थूल शरीर और उग्र स्वभाव वाला, कम सोने वाला, दिन-
रात स्त्रियों की लालसा करने वाला अश्वसंज्ञक पुरुष कहाता है ।
कृष्ण वर्णो महापापी पर निन्दा-परायणः ।
तापितः स्मरबाणेन ह्येष धर्म विवर्जितः ॥
रंग का काला, महापापी, दूसरों की निन्दा करने वाला, काम
बाण से सताया हुआ, धर्म हीन, अश्व-संज्ञक पुरुष कहाता है ।