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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

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असली कोकशास्त्र ७७
ह्रस्वौ च चरणौ यस्य हृष्ट-पुष्ट-कलेवरः ।
योऽसौ लज्जाविहीनश्च, वृषः स परिकीर्तितः ॥
हृष्ट-पुष्ट मजबूत शरीर वाला, तथा जिसके छोटे-छोटे पाँव हो
और लज्जा-विहीन पुरुष वृषभ के समान होता है ।
—:—
अश्व पुरुष
काष्ठतुल्यवपुर्धृष्टो मिथ्याचारश्च निर्भयः
कर्कशो दीर्घदेहश्च दरिद्रस्तु हयो मतः ॥
काठ के समान कठोर शरीर वाला, झूठा, मिथ्या व्यवहारी
निर्भय, धनहीन, लम्बा कहावर मनुष्य अश्व संज्ञक होता है ।
वक्रश्रोत्रशिरोधराधर रदै-
रत्यन्त दीर्घैः कृशैः,
घे स्युः पीवर कण्ठ मांसल भुजाः
स्थूलर्जु सान्द्रैः कचैः
प्रौढष्ये कुटिलाङ्गजानु सुनखाः
दीर्घांगुलि श्रणयोः
दोर्घास्फार विलोल लोचन भृतः
प्रौढाश्च निद्रालसाः ।
टेढ़े मुख वाला, जिसके कान, ओठ, तथा पतले दाँत हों, मोटी
बाँह, घने सीधे बाल, टेढ़ी जाँघ, सुन्दर नख, लम्बी उँगलियों वाला,