रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७६ असली कोकशास्त्र
खेलते हुए शेर की तरह जिसकी सुन्दर चाल हो, मधुरभाषी,
त्यागी, अधिक सोने वाला, लज्जा विहीन, अग्नि समान तेजस्वी
कफ प्रकृतिक शरीर वाला, मध्यान्त अवस्था में सुखी, चर्बी से स्थूल
देह वाला, स्त्री मात्र को प्यारा, तथा जिसका नौ अंगुल लम्बा
गुप्त अंग हो वह वृषभ जाति पुरुष कहाता है ।
बहुगुणबहुबन्धुः शीघ्रकामो नताङ्गः ।
सकलरुचिरदेहः सत्यवादी वृषोऽयम् ॥
गुणी, बहुत कुटुम्ब वाला, अति कामी, कोमलांगी, सुडौल
शरीर वाला, सत्यवादी, वृषभ पुरुष कहलाता है ।
शरीरे पूगगन्धिः स्यात् जिह्वा दीर्घा तथा भवेत् ।
यस्य नरस्य हे ब्रह्मन् वृषः स परिकीर्त्तितः ॥
जिसके शरीर से सुपारी के समान गन्ध आती हो । लम्बी
जबान वाला मनुष्य, वृषभ कहलाता है ।
नारी दर्शनमात्रेण यस्योद्भूतफुल्लमानसः :
विभेति न च पापेभ्यो वृषः स परिकीर्त्तितः ॥
जिस मनुष्य का नारी को देखने मात्र से मन प्रफुल्लित हो
जाय, और जो पाप करने से न डरे, वह वृषभ पुरुष कहाता है ।
शोभनाङ्गो नताङ्गश्च तथा भूरि कुटुम्बकः ।
गुणवान् शीलवांश्चैव वृषोऽयमीदृशोमतः ॥
अधिक कुटुम्ब वाला, शोभनांग, गुणवान और शीलवान,
नाटा मनुष्य वृषभ संज्ञक होता है ।