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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 71, कुल 440 में से

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७२ असली कोकशास्त्र
जिसका विन्ध्याचला इत्यादि (पक्षी) पक्षी पर अर्थात् कोकिला
हंसा इत्यादि (अहि) अर्थात् उरगा भोगिनी इत्यादि (प्रेष्य)
दासी इत्यादि और जिस कन्या का (भीषण) कालिका चण्डिका
इत्यादि नाम हों उससे भी विवाह न करे। इन त्याज दोषणियों का
सर्वथा त्याग कर देना ही उत्तम है।
इस उपरोक्त विधि से परीक्षित स्त्री पुरुषों के परस्पर
विवाह होने पर ही सच्चा दाम्पत्य सुख मिल सकता है, अन्यथा
नहीं।
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पुरुष भेद
चत्वारः पुरुषा ब्रह्मन्नामानि च यथाक्रमम् ।
शशो मृगो वृषश्चैव चतुर्थेस्तु )गस्तथा ॥
शशक, मृग, वृषभ और अश्व ये चार प्रकार के पुरुष माने
गये हैं।
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शशक पुरुष
अल्पाहारल्पदर्पा लघुसुरतरताः शौचभाजो
धनाढ्याः । मानोदीर्णाः शशाःस्युः सुरभिरतजलाः
कान्तिमन्तःसह