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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 7, कुल 440 में से

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६ असली कोकशास्त्र
सिंह रक्खा और मंत्री पं० दीनानाथ जो ने अपने पुत्र का नाम
कामनाथ प्रसिद्ध किया। बड़े-बड़े अनुभवी विद्वान् पंडितों द्वारा
बालकों की परीक्षा करायी गयी। बालकों की मुखाकृति देखकर
सभी ने एक स्वर से उनका भविष्य सुखमय बतलाया।
कामनाथ जब बोलने लायक हुआ, तब उसकी कोकिल समान
मधुर आवाज को सुनकर उसके पिता उसे 'कोका' कहकर पुकारने
लगे। इस नाम के आगे कामनाथ नाम छिप गया और वे बड़े
होकर भी इसी नाम से प्रसिद्ध हुए। जब कोका छोटे थे, तभी
पं० दीनानाथ जी उन्हें अच्छे-अच्छे शिक्षाप्रद श्लोक कंठ कराया
करते थे ! यहाँ तक कि अक्षराभ्यास से लेकर व्याकरणादि सब
शास्त्र उन्होंने ही स्वयं पढ़ाये और समयानुसार सब संस्कार भी
यथाविधि कराये।
जिन विषयों को वे स्वयं नहीं जानते थे, उन विषयों को उन्होंने
अन्य उच्चकोटि के विद्वानों से पढ़ाया। कोका की बुद्धि बड़ी
अपूर्व थी। और स्मरणशक्ति भी असीम थी। जैसे वे सर्वाङ्ग
सुन्दर उत्पन्न हुए, वैसे ही अपूर्व विद्वान् भी हो गये। उनकी
ऐसा उन्नति देखकर उनके माता-पिता फूले नहीं समाते थे।
एक दिन दैव संयोग से कोका को साथ लेकर मंत्री जी राज-
दर्बार में गये। कोका की मोहिनी सूरत देखकर महाराज शान्ति-
देव जी बड़े प्रसन्न हुए। युवराज शम्भुसिंह भी दर्बार में ही बैठे
थे। उन्होंने भी अनेक विद्याओं का अध्ययन किया था।