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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 6, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र ५
कहा,—आप तो इनकी चिन्ता के कारण से अवश्य ही अवगत होंगे ?
मन्त्री ने कहा,—हाँ भगवन्, आज एक दृश्य देखकर एकाएक
इनकी ऐसी हालत हो गयी। यद्यपि सब से कहने योग्य वह बात
नहीं है, किन्तु आप जैसे महात्माओं से छिपाना भी व्यर्थ है।
इसके बाद मन्त्री ने महाराज की अनुमति लेकर चिन्तित होने
का कारण कह सुनाया। जिसे सुनकर महात्मा ने कहा,—आप
चिन्ता न करें, ईश्वर चाहेंगे तो आपकी अभिलाषा पूर्ण होगी।
इतना कहकर महात्मा उन दोनों को साथ ले अपनी कुटी की
ओर चल दिये। उनकी कुटिया करीब ही थी। किन्तु पर्वत की
ऊँचाई-नीचाई के कारण उन्हें पहुँचने में करीब आधा घण्टा लगा।
कुटी में पहुँचकर इन दोनों को एक कुशासन पर बैठा दिया ओर
आप वहाँ से चले गये। थोड़ी देर बाद एक लम्बी लता लिये हुए आ
पहुँचे और उसे महाराज के सामने रखकर बोले,—इस वन-लता में
१५ गाँठ हैं। हर एक गाँठ के ऊपर सूत से कसकर बाँध दें। एक
गाँठ किसी बर्त्तन में रखकर काट लीजियेगा। इसमें से सफेद दूध
के समान रस निकलेगा। उसका चारु-पिंड बना लेना। ये सोम-
लता नाम की प्रसिद्ध लता है। इसके सेवन से अवश्य संतान
प्राप्त होती है।
[ २ ]
कुछ दिनों के बाद ईश्वर की कृपा से महाराज और मन्त्री दोनों
के घर में पुत्र उत्पन्न हुए। महाराज ने अपने पुत्र का नाम शम्भु-