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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 62, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र ६३
' वर्ष वाली युवती है। वे कन्यायें जैसे ( आपः ) जल वा नदी
समुद्र को प्राप्त होती है वैसे ( अस्मेराः ) हमको प्राप्त होने
वाली अपने अपने प्रसन्न अपने से ड्योढ़े वा दूने आयु वाले
( तम् ) उस ब्रह्मचर्य और विद्या से परिपूर्ण शुभ लक्षण युक्त
( युवानम् ) जवान पति को ( परियन्ति ) अच्छे प्रकार प्राप्त
होती है ( सः ) वह ब्रह्मचारी ( शुक्रेभिः ) शुद्ध गुण और
( शिक्वभिः ) वीर्यादि से युक्त हो के ( अस्मै ) हमारे मध्य में
( रेवत् ) अत्यन्त श्रीयुक्त कर्म को और ( दीदाय ) अपने
तुल्य युवति स्त्री को प्राप्त होवे जैसे ( अप्सु ) अन्तरिक्ष
वा समुद्र में ( घृतनिर्णिङ् ) जल को शोधन करने हारा
( अनिध्मः ) आप प्रकाशित विद्युत् अग्नि है इसी प्रकार स्त्री
और पुरुष के हृदय में प्रेम, बाहर अप्रकाशमान और भीतर
सुप्रकाशित रहकर उत्तम सन्तान एवं अत्यन्त आनन्द को गृहाश्रम
में दोनों स्त्री पुरुष प्राप्त होवें। ठीक इसी वेदमंत्र का भाव लेकर
मनु भगवान् कहा है:—
उत्कृष्टायाभिरूपाय वराय सदृशाय च ।
अप्राप्तामपि तां तस्मै कन्यां दद्याद्विचक्षणः ॥
काममामरणात्तिष्ठेद् गृहे कन्यर्त्तुमत्यपि ।
न चैवैनां प्रयच्छेत्तु गुणहीनाय कर्हिचित् ॥
त्रीणि वर्षाण्युदीक्षेत कुमार्यृतुमती सती ।
ऊर्ध्वन्तु कालादेतस्माद्विन्देत सदृशं पतिम् ॥